महिला आरक्षण पर ‘जल्दबाजी’ नहीं चलेगी: कांग्रेस की मांग—विशेष सत्र का समय बढ़े, हो विस्तृत चर्चा


लखनऊ, 30 अप्रैल (वार्ता) महिला आरक्षण अधिनियम को लेकर बुलाए जा रहे विशेष सत्र पर कांग्रेस ने सरकार की तैयारी और मंशा दोनों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने स्पष्ट कहा कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर महज पांच घंटे की चर्चा पर्याप्त नहीं हो सकती।

उन्होंने मांग की कि विशेष सत्र का समय बढ़ाया जाए, ताकि महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील और व्यापक प्रभाव वाले मुद्दे पर सभी पक्ष विस्तार से अपनी बात रख सकें। उनका कहना है कि यह केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी—नारी शक्ति—के अधिकारों और भागीदारी से जुड़ा विषय है।
आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह इस मुद्दे पर जल्दबाजी न करे और पूरे दिन से भी अधिक समय देकर गंभीर और सार्थक चर्चा सुनिश्चित करे। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार महिला आरक्षण को लेकर उतनी गंभीर नहीं दिख रही, जितनी होनी चाहिए।
कांग्रेस ने साफ किया है कि वह महिला आरक्षण के समर्थन में है, लेकिन इस पर ठोस और व्यापक बहस जरूरी है। पार्टी का मानना है कि पर्याप्त समय और गहन विचार-विमर्श के बिना इस तरह के महत्वपूर्ण निर्णय लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं होंगे।
इससे पहले सदन की कार्यवाही की शुरुआत में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर जो बात हो रही है वह केंद्र सरकार का विषय है। इसलिए सदन में यह चर्चा नहीं होनी चाहिए।
माता प्रसाद पांडेय का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि मुझे बहुत बड़ा दुख हुआ कि महिला सशक्तिकरण बिल को लेकर विपक्ष सवाल खड़ा कर रहा है। सशक्तिकरण पूरे देश की महिलावों और उत्तर प्रदेश की महिलाओं को लेकर सरकार गंभीर है।
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया और कहा कि सरकार जानबूझकर गुमराह करना चाहती है।

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