कागजों में मृत महिला पहुंची उच्च न्यायालय , बोली मैं जिंदा हूं , साहब
प्रयागराज, 31 जुलाई (:) सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित हो चुकी चंदा देवी इलाहाबाद उच्च न्यायालय पहुंच कर बोली, " मैं जिंदा हूं साहब , मेरा राशन कार्ड बनवा दीजिए।"
उसने अदालत को बताया रिकॉर्ड में मृत दर्ज होने के कारण उसका राशन कार्ड नहीं बन पा रहा और सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल रहा।
महिला की गुहार पर हैरान न्यायमूर्ति जे जे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने शुक्रवार को प्रयागराज के जिलाधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी और प्रतापपुर, हंडिया के वारी के ग्राम प्रधान को स्पष्टीकरण के साथ तलब किया है। न्यायालय ने सुनवाई के वक्त महिला को भी मौजूद रहने का निर्देश दिया है।
महिला ने अदालत को बताया कि वह प्रतापपुर, हंडिया के वारी गांव की रहने वाली है। पति साधुराम का निधन हो गया है लेकिन मैं जिंदा हूं। इसके बावजूद सरकारी दस्तावेजों में उसे भी मृत घोषित दर्ज कर दिया गया है। इसके कारण न तो राशन कार्ड बन पा रहा है और न ही उसे सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। महिला ने दावा किया कि कई बार अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद उसकी सुनवाई नहीं हुई।
मजबूर होकर उसे न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।अदालत ने इसे नागरिक के मूल अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला माना। कहा कि यदि कोई जीवित व्यक्ति सरकारी अभिलेखों में मृत दर्ज है तो यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि उसके संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है।
jअदालत ने जिले के आला अधिकारियों को अदालत में पेश होकर यह स्पष्ट करने को कहा कि आखिर जीवित महिला को किन परिस्थितियों में नागरिक आपूर्ति विभाग ने उन्हें मृत दर्ज कर दिया। अगर भूल है तो अब तक इसे सुधारा क्यों नहीं गया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिलाधिकारी और डीएसओ यह भी सत्यापित करना होगा कि चंदा देवी वास्तव में साधुराम की विधवा हैं या नहीं।
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