अच्छा नहीं कर रहे बच्चों को स्मार्टफोन देने वाले अभिभावक : योगी
गोरखपुर, 29 जुलाई (वार्ता) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्मार्टफोन के अत्यधिक प्रयोग को बच्चों के लिए नुकसानदेह बताते हुए सभी अभिभावकों को आगाह किया है। उन्होंने आवश्यकता से अधिक स्मार्टफोन के प्रयोग से बचने के लिए, शुरुआत खुद अभिभावकों से करने की अपील की और कहा कि धीरे-धीरे समय कम करते हुए सप्ताह में एक पूरे दिन स्मार्टफोन का प्रयोग न करने का प्रयास होना चाहिए।मुख्यमंत्री बुधवार को गोरखनाथ मंदिर में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं सप्तदिवसीय श्रीराम कथा के विश्राम अवसर पर जहां गुरु शिष्य परंपरा पर प्रकाश डाला वहीं स्मार्टफोन के अत्यधिक प्रयोग से उत्पन्न खतरों से भी सतर्क किया।
योगी ने कहा, ‘जिन माता पिता ने छोटे बच्चों को स्मार्टफोन दे दिया है, उसका परिणाम क्या होगा, यह ईश्वर ही जानें। पर, मेरा मानना है कि ऐसे अभिभावक अच्छा नहीं कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि बच्चे अपने अमूल्य समय में से पांच-छह घंटे स्मार्टफोन पर खर्च कर रहे हैं। इससे उनकी आई साइड कमजोर हो रही है, सोचने की शक्ति कम हो रही है और वे तनाव एवं अवसाद के शिकार हो रहे हैं। कई बार वे आत्मघाती कदम उठा ले रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हम समाधान का रास्ता निकालने की बजाय समस्याओं में व्यस्त हो गए हैं। समाधान पर विश्वास करेंगे तो रास्ते मिल जाएंगे। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन के नुकसान से बच्चों को बचाने की शुरुआत परिवार के अंदर अभिभावकों को स्वयं से करनी होगी। सप्ताह में एक दिन ऐसा अवश्य होना चाहिए जब आप स्मार्टफोन का इस्तेमाल न कर रहे हों। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन का समय क्रमिक तरीके से कम करते हुए सप्ताह में एक दिन बिलकुल न करने का काम उसी तरीके से हो सकता है जैसी कुछ लोग सप्ताह में एक दिन मौन व्रत रहते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब स्मार्टफोन नहीं था तब भी दुनिया चलती थी, तब कहीं अधिक स्वस्थ थी, तब तनाव, डिप्रेशन और द्वंद नहीं था। उन्होंने बच्चों को अच्छा कंटेंट देने और परिवार के साथ बैठकर चर्चा करने की सलाह दी।
योगी ने कहा कि पूरी दुनिया भारत के पर्व त्योहार को कौतूहल और आश्चर्य से समझने का प्रयास करती है। सनातन परंपरा में आषाढ़ पूर्णिमा की तिथि, महर्षि वेदव्यास की पावन जयंती को गुरु पूर्णिमा के रूप में अंगीकार किया गया है। वैदिक और पौराणिक परंपरा को सर्वसुलभ कराने में सबसे बड़ा योगदान कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास जी का रहा है। 5000 वर्ष पहले चारों वेदों को लिपिबद्ध करने का कार्य उन्हीं के सानिध्य में प्रारंभ हुआ। गुरु पूर्णिमा, भारत के सनातनी गुरु परंपरा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का पावन पर्व है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन की पावन धारा में हर मत, संप्रदाय को संरक्षण मिलता है। इसमें कुछ विषधर आकर इसे डंसने का प्रयास करते हैं। हमें सनातन संस्कृति व परंपरा पर आघात कर भारत को अस्थिर करने वाले प्रयासों के खिलाफ जागरूक होना होगा। इसमें सिर्फ स्कूली शिक्षक ही नहीं बल्कि गुरु के रूप में रहने वाले हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना होगा।
योगी ने कहा कि इस देश में कई सारे लोग पश्चिम की हवा में बह गए हैं। वे दुर्गा पूजा में राक्षस चण्ड मुण्ड की पूजा करेंगे। जेएनयू में उन्हें महिमामंडित करने का प्रयास करेंगे। सनातन पर्वों के आयोजनों में व्यवधान उत्पन्न करने का प्रयास करेंगे। ऐसे लोगों के लिए हजारों वर्ष पुरानी श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता सबक है। रावण हो या बालि, दोंनो ने ही मातृशक्ति का अपमान किया था और बदले में उन्हें मौत मिली थी। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति और मातृभूमि का अपमान करने वाले कठोर दंड के ही पात्र हैं।
गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में 23 जुलाई से चल रही श्रीरामकथा का विश्राम व्यासपीठ पर विराजमान श्रीरामचरितमानस ग्रंथ की आरती के साथ हुई। सबसे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरती उतारी। उन्होंने कथाव्यास आचार्य शांतनु जी महाराज के प्रति आभार भी व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के संबोधन से पूर्व लोक गायक राकेश श्रीवास्तव ने गुरु की महिमा पर एक कर्णप्रिय भजन सुनाया।
कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, सांसद रविकिशन शुक्ल, गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, देवीपाटन शक्तिपीठ के महंत मिथिलेशनाथ, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास, समेत कई साधु-संत, जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, प्रबुद्धजन व बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही।
योगी ने कहा कि इस देश में कई सारे लोग पश्चिम की हवा में बह गए हैं। वे दुर्गा पूजा में राक्षस चण्ड मुण्ड की पूजा करेंगे। जेएनयू में उन्हें महिमामंडित करने का प्रयास करेंगे। सनातन पर्वों के आयोजनों में व्यवधान उत्पन्न करने का प्रयास करेंगे। ऐसे लोगों के लिए हजारों वर्ष पुरानी श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता सबक है। रावण हो या बालि, दोंनो ने ही मातृशक्ति का अपमान किया था और बदले में उन्हें मौत मिली थी। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति और मातृभूमि का अपमान करने वाले कठोर दंड के ही पात्र हैं।
गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में 23 जुलाई से चल रही श्रीरामकथा का विश्राम व्यासपीठ पर विराजमान श्रीरामचरितमानस ग्रंथ की आरती के साथ हुई। सबसे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरती उतारी। उन्होंने कथाव्यास आचार्य शांतनु जी महाराज के प्रति आभार भी व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के संबोधन से पूर्व लोक गायक राकेश श्रीवास्तव ने गुरु की महिमा पर एक कर्णप्रिय भजन सुनाया।
कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, सांसद रविकिशन शुक्ल, गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, देवीपाटन शक्तिपीठ के महंत मिथिलेशनाथ, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास, समेत कई साधु-संत, जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, प्रबुद्धजन व बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही।
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