हथकरघा उद्योग से जुड़े 30 लाख लोगों की आजीविका मजबूत करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध : योगी


लखनऊ, 7 अगस्त (वार्ता)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि प्रदेश के हथकरघा उद्योग से जुड़े हस्तशिल्पियों और बुनकरों ने अपने कौशल और परिश्रम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाई है। राज्य सरकार उनके कल्याण, उत्पादों की ब्रांडिंग और वैश्विक बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है।

मुख्यमंत्री यहां आयोजित ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह-2026’ को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने ‘संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना’ के तहत चयनित बुनकरों को सम्मानित किया तथा मुख्यमंत्री हथकरघा एवं पावरलूम उद्योग विकास योजना और झलकारी बाई कोरी हथकरघा एवं पावरलूम विकास योजना के लाभार्थियों को प्रतीकात्मक चेक वितरित किए।
योगी ने कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस केवल एक दिवस नहीं, बल्कि भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में स्वदेशी की भावना के उदय का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने खादी, स्वदेशी और हथकरघा को आजादी के आंदोलन का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया था, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर वर्ष 2015 से सात अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग ढाई लाख परिवारों के 14 से 15 लाख लोग हथकरघा उद्योग से जुड़े हैं और पावरलूम क्षेत्र को जोड़ने पर यह संख्या लगभग 30 लाख हो जाती है।
सरकार ने मुख्यमंत्री हथकरघा उद्योग विकास योजना, झलकारी बाई कोरी योजना और विद्युत दर रियायत जैसी योजनाओं के माध्यम से लगभग 40 हजार बुनकरों को 109 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरठ, मुरादाबाद, अलीगढ़, आगरा, बरेली, लखनऊ, बाराबंकी, अंबेडकर नगर, संत कबीर नगर, गोरखपुर, मऊ, आजमगढ़, वाराणसी, भदोही और मिर्जापुर सहित अनेक जिलों के हस्तशिल्प उत्पादों को वैश्विक पहचान मिली है।
उन्होंने कहा कि भदोही की कालीन आज दुनिया के बाजार में अपनी अलग पहचान बना चुकी है और नई संसद भवन में भी भदोही की कालीन को प्राथमिकता दी गई।
उन्होंने कहा कि लखनऊ और हरदोई के बीच एक हजार एकड़ क्षेत्र में पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित किया जा रहा है। इसके अलावा प्रदेश के पांच स्थानों पर संत कबीरदास के नाम पर टेक्सटाइल पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जिससे बुनकरों और हस्तशिल्पियों को आधुनिक सुविधाएं और नए बाजार उपलब्ध होंगे। योगी ने कहा कि ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ योजना के माध्यम से पारंपरिक उत्पादों की ब्रांडिंग को नई गति मिली है।
उन्होंने सरकारी विभागों को निर्देश दिया कि हथकरघा उत्पादों की खरीद को बढ़ावा दिया जाए तथा अस्पतालों और सरकारी अतिथि गृहों में स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित बेडशीट, तौलिए और अन्य वस्त्रों के उपयोग को प्राथमिकता दी जाए, जिससे बुनकरों की आय बढ़े और उत्पादों को व्यापक पहचान मिले। समारोह को हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने भी संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस भारत की प्राचीन बुनकर परंपरा और स्वदेशी भावना का उत्सव है तथा प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हस्तशिल्पियों और बुनकरों को तकनीक, प्रशिक्षण, विपणन और ब्रांडिंग से जोड़ने का कार्य कर रही है।
इस अवसर पर हथकरघा उद्योग पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में हथकरघा दिवस पर दिए गए संदेश का प्रसारण भी किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों तथा बड़ी संख्या में बुनकरों और हस्तशिल्पियों ने भाग लिया।

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