हर्ष फायरिंग के लिए नहीं है लाइसेंसी हथियार, एक एक कारतूस का देना होगा हिसाब
प्रयागराज, 01 अगस्त (दिनेश तिवारी) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंसी हथियार का उपयोग हर्ष फायरिंग ,शादी या धार्मिक आयोजनों में नहीं किया जा सकता।
न्यायालय ने कहा कि हर लाइसेंसधारी को खरीदे और इस्तेमाल किए गए प्रत्येक कारतूस का पूरा हिसाब रखना होगा। रिकॉर्ड नहीं होने पर शस्त्र लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।
न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने अखिलेश कुमार की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
मामले में वर्ष 2019 की जांच के दौरान पता चला कि याचिकाकर्ता ने 857 कारतूस खरीदे थे , लेकिन केवल 57 जिंदा कारतूस और 33 खाली खोखे ही प्रस्तुत कर सका। शेष 757 कारतूसों के बारे में उसने दावा किया कि उनका उपयोग टेस्टिंग , शादी , छठ पूजा और दुर्गा पूजा जैसे आयोजनों में हुआ , लेकिन इसका कोई रिकॉर्ड नहीं दिखा सका।
उच्च न्यायालय ने कहा कि शस्त्र लाइसेंस कोई अधिकार नहीं , बल्कि शर्तों के अधीन दी गई विशेष सुविधा है। यदि लाइसेंसधारी कारतूसों का हिसाब नहीं रखता या हर्ष फायरिंग में हथियार का इस्तेमाल करता है, तो यह लाइसेंस की शर्तों का गंभीर उल्लंघन है। न्यायालय ने इसी आधार पर लाइसेंस निरस्त करने के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।
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