लोक कलाकार सामूहिक स्मृति के संरक्षक, भविष्य की कल्पना के सृजक: मुर्मु
नयी दिल्ली, 13 अगस्त (वार्ता) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को राजधानी में आयोजित एक समारोह में प्रतिष्ठित कलाकारों को वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप तथा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किये और लोक कलाकारों को समाज की सामूहिक स्मृति का संरक्षक तथा भविष्य की कल्पनाएं प्रस्तुत करने वाला बताया।श्रीमती मुर्मु ने कहा कि देश की सभी विभिन्न कला शैलियों में गुरु-शिष्य परंपरा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हमारी कलाओं की सबसे महत्वपूर्ण पुस्तक जीवंत गुरु ही होते हैं। आज के तेजी से बदलते दौर में हमारी बहुत सी लोक-कलाओं पर विलुप्त होने का संकट मंडरा रहा है। ऐसी कला विधाओं का न केवल साक्ष्य और प्रमाण रखना जरूरी है बल्कि उन्हें जीवंत रखने के लिए विशेष प्रयास जरूरी हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि कला के संस्कार और समझ से जीवन को समृद्ध करने के लिए प्रकृति को सबसे सहज प्रशिक्षण संस्थान है। लोक और जनजातीय कलाओं में जीवन का स्वाभाविक उल्लास और प्रकृति के साथ गहरा संवाद दिखाई देता है। इन कला रूपों में समुदाय की स्मृति और सामूहिक चेतना सहज रूप से व्यक्त होती है। यही कारण है कि लोक कलाएं भारत की सांस्कृतिक पहचान का अत्यंत महत्त्वपूर्ण आधार हैं।
उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि संगीत नाटक अकादमी इसी उद्देश्य से 'कला-दीक्षा' कार्यक्रम का आयोजन कर रही है। उन्होंने वरिष्ठ कलाकारों से कहा कि अगली पीढ़ी को तैयार करने के लिए योजना पूर्वक प्रयास करें।
राष्ट्रपति ने कहा कि आज के समारोह में जिन कलाकारों को सम्मानित किया गया है "वे मिलकर देश का एक ऐसा सांस्कृतिक मानचित्र प्रस्तुत करते हैं - जिसमें इस देश की मिट्टी की कथाएं और गीत जुड़े हैं; ऐसा मानचित्र जिसमें विविधता से भरी इस धरती के नृत्य और उत्सव समाए हैं और सदियों से विकसित हुई इसकी भाषाओं और बोलियों की यादें समाई हैं।"
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि भारत की संस्कृति जड़ों से जुड़ी हुई है। अलग-अलग खान-पान, वेषभूषा, नृत्य और संगीत, प्रकृति से प्रेरित हैं। विविधता और एकता का यह संगम हमारी कलाओं की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है। कहा कि संगीत नाटक अकादमी को भारत की सॉफ्ट पावर का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अकादमी आने वाले समय में भी भारत की सांस्कृतिक ऊर्जा से समूचे विश्व को लाभान्वित करती रहेगी।
वर्ष 2025 के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार पाने वालों में इरेंगबाम नलिनी देवी (नृत्य), इलियाना सिटरिस्टी (नृत्य), हरमनप्रीत सिंह (नृत्य), गिरिजा चंद्रन (अन्य पारंपरिक / लोक / जनजातीय / नृत्य / संगीत / रंगमंच एवं कठपुतली कला), डोमिन करबक (नृत्य), धुलीपाला श्रीनिवास (संगीत), धिरेन धर्मसे मर्चेंट (रंगमंच), चित्तरंजन ज्योतिषी (संगीत), चेतना दास (रंगमंच), भेरू सिंह चौहान (लोक संगीत), भास्कर ज्योति ओझा (संगीत), अशोक गोविंद पटकी (अन्य पारंपरिक / लोक / जनजातीय / नृत्य / संगीत / रंगमंच एवं कठपुतली कला), अनूप रंजन पांडे (लोक संगीत), अनूर आर. अनंत कृष्ण शर्मा (संगीत), ए.वी. आनंद (संगीत), ए.एस. कृष्णन (संगीत) और अली मोहम्मद (लोक संगीत) शामिल हैं।
साल 2024 के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार हवा सिंह (लोक संगीत), गुम्मडी गोपाल कृष्ण राव (रंगमंच), गुलाबी सपेरा (नृत्य), दुर्शेटी रामैया (लोक संगीत), दिनेश कुमार पोद्दार (रंगमंच), सोमारी देवी (नृत्य), बुटान देवी (नृत्य), बिपुल चंद्र दास (नृत्य), बिचित्रानंद स्वैन (अन्य पारंपरिक / लोक / जनजातीय / नृत्य / संगीत / रंगमंच एवं कठपुतली कला), भारत भूषण गोस्वामी (संगीत), आतमजीत सिंह (रंगमंच), अरुण जनार्दन नलावड़े (अन्य पारंपरिक / लोक / जनजातीय / नृत्य / संगीत / रंगमंच एवं कठपुतली कला), अरुण नागेश काशलकर (संगीत), आनंद भाटे (संगीत) को प्रदान किये गये।

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