शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान एवं कौशल प्रदान करना नहीं , बल्कि सभ्यता का निर्माण करना भी होना चाहिए: प्रो सुतावने


प्रयागराज, (दिनेश तिवारी)  भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी- इलाहाबाद) के निदेशक प्रो मुकुल शरद सुतावने ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान एवं कौशल प्रदान करना नहीं , बल्कि शिक्षा के माध्यम से सभ्यता का निर्माण करना भी होना चाहिए।

       प्रो. सुतावने ने संस्थान के 28वां स्थापना दिवस पर बुधवार को संबोधित करते हुए  कहा कि इस वर्ष के स्थापना दिवस को  "रिकॉग्निशन  डे "  के रूप में मनाया जा रहा है, क्योंकि संस्थान ने पिछले वर्षों में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।  पिछले तीन वर्षों के दौरान संस्थान द्वारा अनेक महत्वपूर्ण शोध परियोजनाएं, आउटरीच कार्यक्रम तथा अकादमिक एवं तकनीकी पहल संचालित की गई हैं , जिससे संस्थान की शैक्षणिक एवं अनुसंधान पहचान और अधिक सुदृढ़ हुई है।

        प्रो  सुतावने ने जेन.जी के युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि तकनीकी एवं वैज्ञानिक प्रगति के साथ.साथ जीवन में मानवीय मूल्यों और नैतिकता को भी मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान एवं कौशल प्रदान करना नहीं , बल्कि शिक्षा के माध्यम से सभ्यता का निर्माण करना भी होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से जिम्मेदारी , संवेदनशीलता, नैतिकता और मानवीय मूल्यों को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आग्रह किया।

    इस अवसर पर वरिष्ठ प्रोफेसर शेखर वर्मा ने अपने संबोधन में ट्रिपल आईटी.इलाहाबाद की 28 वर्षों की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने संस्थान की उपलब्धियों, विकास के विभिन्न पड़ावों तथा शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में संस्थान के योगदान को रेखांकित किया।

      प्रो बी के अग्रवाल (सेवानिवृत्त प्रोफेसर) भौतिकी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों को सदैव जिज्ञासु बने रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने शिक्षकों से निरंतर प्रश्न पूछते रहना चाहिएए क्योंकि प्रश्न करने और जिज्ञासा बनाए रखने से ही सीखने की प्रक्रिया जीवंत रहती है।

       समारोह में सोसाइटी फॉर इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शंस एंड सिक्योरिटी , चेन्नई के निदेशक डॉ एन सुब्रमणियन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने 6-जी नेटवर्क में उभरते नवाचार तंत्र तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए आई) और साइबर सुरक्षा के तेजी से बदलते परिदृश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला।

      डॉ सुब्रमणियन ने क्वांटम प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से क्वांटम कम्युनिकेशन, क्वांटम रेजिलिएंस और पोस्ट.क्वांटम क्रिप्टोग्राफी की परिवर्तनकारी संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि उन्नत कंप्यूटिंग और बढ़ते साइबर खतरों से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए सुरक्षित एवं भविष्य के अनुरूप संचार प्रणालियों का विकास आवश्यक है।

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