जेन जी” तक पहुंचेगी योगी सरकार,प्रशासनिक अधिकारी करेंगे छात्रों से संवाद


विद्या शंकर राय

लखनऊ, 7 अगस्त (वार्ता) देश की राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर हाल ही में हुए छात्रों के प्रदर्शन और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत की नसीहतों के बाद अब उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने “जेन जी” तक पहुंचने की कवायद शुरू कर दी है ताकि बड़ी परीक्षाओं को लेकर उनके मन में उठ रहे सवालों का समय रहते समाधान किया जा सके।
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के इंटरमीडिएट स्तर के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार, उद्यमिता और लोक सेवा के प्रति प्रेरित करने के लिए नई पहल शुरू की है। इसके तहत जनपदों में कार्यरत भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) तथा भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के युवा अधिकारी विद्यालयों में जाकर विद्यार्थियों से नियमित संवाद करेंगे और उनका मार्गदर्शन करेंगे।
इस आदेश को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव (माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा ) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने यूनिवार्ता को बताया कि प्रदेश के युवाओं का सर्वांगीण विकास तथा उनकी क्षमताओं का समुचित उपयोग राज्य सरकार की प्राथमिकता है। युवाओं को समय-समय पर उचित मार्गदर्शन और सकारात्मक परामर्श उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मविश्वासी, जागरूक और विकासोन्मुख नागरिक बनाया जा सकता है।
श्री शर्मा ने बताया कि युवा आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारी अपने अनुभव, कार्यशैली और जीवन संघर्ष के आधार पर विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं। उनके साथ प्रत्यक्ष संवाद से विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान होगा, उन्हें अपने भविष्य की दिशा तय करने में सहायता मिलेगी तथा शासन और समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।
शर्मा के मुताबिक, सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि जनपद में तैनात युवा आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारी प्रत्येक माह कम से कम एक इंटरमीडिएट स्तर के विद्यालय का भ्रमण करें। इसके लिए राजकीय, सहायता प्राप्त, वित्तविहीन और निजी विद्यालयों के प्रबंधन से समन्वय स्थापित किया जाए।
उन्होंने बताया कि विद्यालय भ्रमण के दौरान अधिकारी विद्यार्थियों से संवाद कर उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं, करियर निर्माण, व्यक्तित्व विकास, नैतिक मूल्यों तथा सार्वजनिक सेवा के अवसरों के संबंध में मार्गदर्शन देंगे।
शासन का मानना है कि इस पहल से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा, उन्हें अपने लक्ष्यों के प्रति स्पष्ट दिशा मिलेगी और वे राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित होंगे।
निर्देश के अनुसार, प्रत्येक जिलाधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि जनपद में तैनात युवा आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारी प्रत्येक माह कम से कम एक राजकीय, सहायता प्राप्त, वित्तविहीन अथवा निजी इंटरमीडिएट विद्यालय का भ्रमण करें।
विद्यालयों में औपचारिक भाषण के बजाय सहभागितापूर्ण संवाद और प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिससे विद्यार्थी खुलकर अपनी जिज्ञासाएं रख सकें।
संवाद कार्यक्रमों में जीवन का लक्ष्य निर्धारण, करियर नियोजन, प्रभावी अध्ययन पद्धति, समय प्रबंधन और आत्मानुशासन जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसके साथ ही संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी), अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों की संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई), राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट), कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी), राज्य पात्रता परीक्षा (सेट) तथा उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी संबंधी जानकारी भी दी जाएगी।
विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा, उद्यमिता, स्टार्टअप, केंद्र और राज्य सरकार की युवा कल्याण योजनाओं, वित्तीय एवं संचार कौशल, व्यापार प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, नशा मुक्ति, तनाव प्रबंधन तथा आत्मविश्वास विकसित करने जैसे विषयों पर भी मार्गदर्शन दिया जाएगा।
शासन ने निर्देश दिया है कि जिलाधिकारी प्रत्येक माह इन कार्यक्रमों का कैलेंडर तैयार करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी युवा अधिकारी सक्रिय रूप से इसमें भाग लें।
प्रत्येक जनपद को आयोजित कार्यक्रमों का संक्षिप्त प्रतिवेदन, जिसमें विद्यालय का नाम, भ्रमण की संख्या, सहभागी अधिकारी, संवाद के प्रमुख विषय और विद्यार्थियों से प्राप्त सुझाव शामिल हों, प्रत्येक माह की पांच तारीख तक माध्यमिक शिक्षा विभाग को भेजना होगा।
निर्देश में कहा गया है कि जिलाधिकारी स्वयं इन कार्यक्रमों की गुणवत्ता की समीक्षा करेंगे तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप नवाचार करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
शासन का विश्वास है कि इस पहल से प्रदेश के युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा, उन्हें अपने भविष्य के प्रति स्पष्ट दिशा मिलेगी और वे समाज एवं राष्ट्र निर्माण में अधिक सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित होंगे।

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