मोबाइल फोन विनिर्माण योजना अधिसूचित , वैष्णव ने कहा भारतीय ब्रांडों को मिलेगा प्रोत्साहन


नयी दिल्ली, 21 अगस्त (वार्ता) इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेइटी) ने मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) को अधिसूचित किया है, जिसके लिए 62,500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मोबाइल फोन विनिर्माण योजना से भारतीय स्वामित्व वाले मोबाइल ब्रांडों, बौद्धिक संपदा (आईपी) और डिजाइन के विकास को महत्वपूर्ण प्रोत्साहन मिलेगा।
मंत्रालय की शुक्रवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार इस योजना का उद्देश्य उत्पादन का पैमाना बढ़ाकर, घरेलू मूल्य संवर्धन (डीवीए) के माध्यम से मोबाइल विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत एवं गहरा करके तथा घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को सुदृढ़ बनाकर भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि एमपीएमएस भारतीय मोबाइल फोन ब्रांडों को तकनीकी संप्रभुता हासिल करने, अधिक आर्थिक मूल्य अर्जित करने तथा डिजाइन और अनुसंधान एवं विकास (आऐडडी) के क्षेत्र में भारतीय पेटेंट को प्रोत्साहित करने में भी सहायता करेगी। इसके साथ ही, यह योजना रोजगार के अवसर पैदा करने में भी योगदान देगी।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि डिजाइन, बौद्धिक संपदा और ब्रांड भारतीय स्वामित्व वाले होने चाहिए तथा संबंधित बाजार खंड में उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ उत्पादों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए बारीकी से मूल्यांकन करेगी कि बौद्धिक संपदा वास्तव में भारतीय स्वामित्व वाली है। साथ ही, उद्योग के साथ परामर्श करके गैर-वित्तीय और अन्य सहायता उपाय विकसित किये जायेंगे।
एमपीएमएस तहत दो लक्षित खंड टीएस1 (मोबाइल फोन विनिर्माण को प्रोत्साहन देना) और टीएस 2 ( भारतीय मोबाइल फोन ब्रांडों को सहायता प्रदान करना) शामिल हैं। योजना की अवधि 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्ष की होगी। टीएस2 के तहत आवेदकों को 1 वर्ष की तैयारी/स्थापना अवधि दी जा सकती है।
टीएस1 के लिए योजना में 2.25 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक अलग-अलग दरों पर प्रोत्साहन दिया जायेगा। वहीं टीएस2 के तहत भारतीय ब्रांडों के लिए 5प्रतिशत प्रोत्साहन तथा भारतीय डिजाइन और अनुसंधान एवं विकास के लिए अतिरिक्त 3 प्रतिशत प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसके अलावा, योजना के तहत भारतीय ब्रांडों को गैर-वित्तीय सहायता भी प्रदान की जायेगी। इसके अतिरिक्त, योजना के तहत दोनों लक्षित खंडों के लिए प्रमुख घटकों/उप-असेंबली की घरेलू खरीद को प्रोत्साहित करने के लिए अधिकतम 1.5 प्रतिशत का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जायेगा। इस योजना के तहत आवेदक भारत में पंजीकृत मोबाइल फोन निर्माता होने चाहिए, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (ईएमएस) प्रदाता भी शामिल हैं। आवेदक की बिक्री और उसे देय प्रोत्साहन की गणना ब्रांड के आधार पर की जायेगी।
टीएस1 के तहत भारत में पंजीकृत ऐसे मोबाइल फोन निर्माता पात्र होंगे जिनका वित्त वर्ष 2025-26 में न्यूनतम 10,000 करोड़ रुपये का कारोबार हो । इनमें इनमें ईएमएस कंपनियां भी शामिल हैं। मौजूदा ब्रांडों को वित्त वर्ष 2025-26 की बिक्री के अतिरिक्त, प्रत्येक वर्ष कम से कम 5,000 करोड़ रुपये की वार्षिक बिक्री सीमा पूरी करनी होगी। किसी नये ब्रांड को तभी पात्र माना जायेगा, जब वह भारत में कुल 10,000 करोड़ रुपये की वार्षिक बिक्री हासिल कर ले। इसके बाद उसे हर वर्ष 5,000 करोड़ रुपये की न्यूनतम वार्षिक बिक्री सीमा पूरी करनी होगी।
टीएस2 के तहत भारत में पंजीकृत मोबाइल फोन निर्माता ( ईएमएस भी) पात्र होंगे। उनके लिए वित्त वर्ष 2025-26 में न्यूनतम 1,000 करोड़ रुपये का कारोबार आवश्यक है। इसके साथ ही कंपनी को 'भारतीय ब्रांड' की सभी निर्धारित शर्तों को पूरा करना होगा।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गार्डनिंग के क्षेत्र में रोजगार की है अपार संभावनाएं: डॉ वीरेंद्र सिंह

24 जुलाई 2026 को चंद्रमा दिखाई देगा अन्टारेस (ज्येष्ठा नक्षत्र के योगतारा) के पास

सपा अध्यक्ष को लगता है कि मुसलमान उनकी जेब में हैं: मायावती