चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को एथेनाॅल से जोड़ना ठीक नहीं, कीमतों पर अंकुश लगाने के कदम उठाये गये : सरकार




नयी दिल्ली, 21 अगस्त (वार्ता) सरकार ने कहा है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी पर अंकुश लगाने और त्योहारों के दिनों में चीनी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जमाखोरी रोकने और आपूर्ति बढ़ाने के लिए कई कदम उठाये गये हैं। साथ में उसने यह भी कहा है कि कीमतों में हाल में बढ़ोतरी को एथेनॉल उत्पादन से जोड़ना सही नहीं है।

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की शुक्रवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि हाल के सप्ताह में चीनी के दामों में वृद्धि हुई है और सरकार स्थिति पर करीबी नजर रख रही है और उपभोक्ताओं के लिए चीनी की पर्याप्त उपलब्धता तथा कीमतों में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठा रही है। चीनी की कीमतों में हालिया वृद्धि को एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से जोड़ना सही नहीं है।"
मंत्रालय ने कहा है कि वर्तमान सीजन में चीनी का उत्पादन पहले के अनुमान से कम हुआ है, इसके बावजूद, देश में पर्याप्त चीनी भंडार उपलब्ध है, जिससे अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू मांग पूरी की जा सकेगी। इसके साथ ही सरकार जमाखोरी को रोकने के लिए स्टॉक नियंत्रण आदेश , गन्ने की पेराई जल्द शुरू करने की सलाह जारी करने और 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति जैसे कदम उठाए हैं।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि चीनी का भाव 20 जुलाई के 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 20 अगस्त को 55.70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। यह वृद्धि कई कारकों के कारण हुई है। इनमें घरेलू उत्पादन का अनुमान से कम रहना, त्योहारी मौसम से पहले मांग में बढ़ोतरी, मौसम संबंधी कारणों से गन्ने की फसल को नुकसान, वैश्विक स्तर पर चीनी की आपूर्ति में कमी तथा उद्योग के कुछ वर्गों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं।
मंत्रालय ने कहा है, "वास्तव में, एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के उपयोग का हिस्सा 2022-23 में लगभग 12 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में करीब नौ प्रतिशत रह गया है। इसके अलावा, अब देश में उत्पादित एथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अनाज, विशेष रूप से मक्का, से आता है।"
मंत्रालय ने कहा है कि वर्तमान सीजन में चीनी का उत्पादन लगभग 306 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि पहले राज्यों ने इसके करीब 343 टन तक रहने का अनुमान लगाया था। मंत्रालय के अनुसार 'रेड रॉट और टॉप बोरर' रोगों के साथ-साथ कई क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश के कारण जलभराव से गन्ने का उत्पादन प्रभावित हुआ है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर चीनी महंगी हुई है तथा उसकी आपूर्ति में कमी एक वैश्विक घटना है और यह केवल भारत तक सीमित नहीं है। वर्ष 2026-27 में वैश्विक बाजार में चीनी की मांग की तुलना में आपूर्ति लगभग 33 लाख टन कम रहने का अनुमान है। मौसम संबंधी चिंताओं ने भी वैश्विक बाजार के अनुमान को प्रभावित किया है।
इन अनुमानों के कारण वैश्विक बाजार में चीनी के भाव तेजी से चढ़े हैं। 30 जून को विश्व बाजार में भाव औसतन 474 डॉलर प्रति टन था जो 20 अगस्त 2026 को 552 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया। इस तरह दो महीने से भी कम समय में भाव 16 प्रतिशत से अधिक बढ़ गये हैं।
मंत्रालय ने स्पष्ट कहा है कि एथेनॉल कार्यक्रम से किसानों को लाभ और चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है। देश में सामान्यतः हर वर्ष लगभग 320-340 लाख टन चीनी का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत करीब 280-290 लाख टन है। अधिक उत्पादन वाले वर्षों में अतिरिक्त चीनी का भंडार चीनी मिलों की पूंजी को रोक देता है और इससे गन्ना किसानों को भुगतान में देरी हो सकती है।
अतिरिक्त चीनी को एथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने से इस संरचनात्मक समस्या से निपटने में मदद मिली है और चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति बेहतर हुई है। इस वर्ष 20 अगस्त तक 2025-26 के चीनी सीजन के गन्ना किसानों के 97 प्रतिशत बकाये का भुगतान किया जा चुका है।
चीनी मिलों की बेहतर वित्तीय स्थिति से सरकारी सहायता पर उनकी निर्भरता भी कम हुई है। वर्ष 2014 से 2021 के बीच चीनी उद्योग को लगभग 14,600 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई थी, जबकि 2021-22 के बाद ऐसी कोई सब्सिडी घोषित नहीं की गई है। वहीं, लंबे समय में उपभोक्ताओं के लिए चीनी की कीमतें भी मोटे तौर पर स्थिर रही हैं। अगस्त 2024 से जुलाई 2026 के बीच कीमतों में सालाना औसतन केवल लगभग तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
मंत्रालय ने कहा है कि कुछ चीनी मिलों और कारोबारियों की तरफ से सट्टेबाजी और जमाखोरी की कुछ हरकतों से वर्तमान में मूल्य वृद्धि को बल मिला है। इसे देखते हुए सरकार ने 01 अगस्त से 30 नवंबर तक देशभर में चीनी डीलरों पर 400 टन की स्टॉक सीमा लागू कर दी है तथा आगामी पहली सितंबर से थोक उपभोक्ताओं को 15 दिनों की खपत से अधिक चीनी का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी।
केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की संयुक्त टीमें चीनी मिलों में चीनी के भंडार का भौतिक सत्यापन कर रही हैं, ताकि जमाखोरी और कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशों पर रोक लगाई जा सके।
घरेलू उपलब्धता को और बढ़ाने के लिए एहतियाती कदम के रूप में सरकार ने अभी इसी सप्ताह 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने का निर्णय लिया है।
राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर 2026 से गन्ने की पेराई शुरू करने की सलाह दी गई है। इससे अक्टूबर में चीनी का उत्पादन सामान्यतः होने वाले तीन-चार लाख टन से बढ़कर 10 लाख टन से अधिक होने की उम्मीद है। इससे त्योहारी मौसम के दौरान चीनी की उपलब्धता और बेहतर होगी।
मंत्रालय ने कहा है कि सरकार उपभोक्ताओं और गन्ना किसानों दोनों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। वह चीनी के भंडार, कीमतों और बाजार गतिविधियों पर लगातार नजर रखेगी तथा जमाखोरी और अनुचित मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी। साथ ही, किसानों के बकाये का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए भी प्रयास जारी रखे जाएंगे।

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