कौशल विकास मिशन और आईआईए के बीच एमओयू, युवाओं को मिलेगा उद्योगों से सीधा जुड़ाव


लखनऊ, 13 अगस्त (वार्ता) उत्तर प्रदेश के युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और अप्रेंटिसशिप के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के बीच गुरुवार को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम, यूपीएसडीएम के मिशन निदेशक पुलकित खरे तथा संयुक्त निदेशक मयंक गंगवार उपस्थित रहे। समझौते का उद्देश्य उद्योग एवं प्रशिक्षण संस्थानों के बीच समन्वय को मजबूत करना, अप्रेंटिसशिप एवं प्लेसमेंट के अवसर बढ़ाना तथा युवाओं को व्यावहारिक और रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है।
मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि इस पहल के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रमों को उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ा जाएगा। आईआईए के क्षेत्रीय चैप्टर प्रमुखों को जिला स्तर पर कार्यरत जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों (डीपीएमयू) से जोड़ा जाएगा, जिससे प्रशिक्षण और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।
उन्होंने कहा कि उद्योगों द्वारा आवश्यक कच्चा माल (रॉ मैटेरियल) प्रशिक्षण केंद्रों को उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे प्रशिक्षार्थी वास्तविक औद्योगिक कार्यों का अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। आईआईए से जुड़े उद्यमी एवं तकनीकी विशेषज्ञ प्रशिक्षण केंद्रों पर अतिथि व्याख्यान, मेंटरशिप और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। साथ ही प्रशिक्षार्थियों को सॉफ्ट स्किल्स, कार्यस्थल व्यवहार तथा उद्योगों में हो रहे तकनीकी बदलावों की जानकारी भी दी जाएगी।
रोजगार और अप्रेंटिसशिप के अवसर बढ़ाने के लिए आईआईए के ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। इसके अतिरिक्त जॉब फेयर, अप्रेंटिसशिप मेले, औद्योगिक भ्रमण और इंडस्ट्री एक्सपोजर कार्यक्रमों का नियमित आयोजन किया जाएगा, ताकि युवाओं को उद्योगों से सीधे जुड़ने का अवसर मिल सके।
यह पहल प्रथम चरण में लखनऊ, बाराबंकी, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, अमेठी, वाराणसी, एनसीआर और बरेली में लागू की जाएगी। इसके सफल क्रियान्वयन के बाद इसे प्रदेश के सभी 75 जिलों तक विस्तारित करने की योजना है। यूपीएसडीएम और आईआईए के बीच यह तीन वर्ष की गैर-वित्तीय साझेदारी है। समझौते के प्रभावी संचालन और प्रगति की निगरानी के लिए एक संयुक्त समन्वय समिति (ज्वाइंट कोऑर्डिनेशन कमेटी) का गठन किया गया है। समिति प्रत्येक तिमाही में प्रशिक्षण की गुणवत्ता, अप्रेंटिसशिप, प्लेसमेंट तथा अन्य परिणामों की समीक्षा करेगी।

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