पूर्णिमा श्राद्ध आज, श्रद्धा और आस्था के साथ 27 सितम्बर से शुरू होगा पितृपक्ष


गोरखपुर( दुर्गेश मिश्र) । श्री हनुमत् ज्योतिष सेवा संघ के संस्थापक व विद्वत् जनकल्याण समिति के महामंत्री ज्योतिषाचार्य पंडित बृजेश पाण्डेय के अनुसार इसबार पितृपक्ष श्री शुभ संवत् 2083 शाके 1948 आश्विन कृष्ण पक्ष  दिनांक 27 सितंबर दिन रविवार से आरंभ होकर 10 अक्टूबर तक रहेगा।  इस दौरान सभी सनातनी अपने पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए विधि-विधान पूर्वक तर्पण एवं श्राद्ध करें तथा ब्राह्मण भोजन, गौग्रास श्वान, पिपिलिका  आदि को भोजन दें। इसमें वस्त्र दान, अन्न का दान करने का विशेष महत्व है तथा पितृ पक्ष मे जातक त्रिपिंडी का पूजा अवश्य कराएं । आप देवी देवताओं का पूजा करते है फिर भी सफलता नही मिलती है तो समझे पितर प्रसन्न नहीं है। अगर पितर नाराज रहते है तो श्री नारायण भी संतुष्ट नही होते, अगर पितरो को संतुष्ट करते हैं तो नारायण प्रसन्न होते हैं और सभी बिगडे काम बनने लगते है, इसलिए पितरों के प्रसन्नता के लिए त्रिपिंडी कराते रहना चाहिए। पितृपक्ष में नवग्रहों का जप-तप महामृत्युंजय मंत्र का जप, बगलामुखी मंत्र का जप, महाबिद्या पाठ एवं पितृगायत्री, पितृसूक्त का पाठ कराना श्रेयस्कर होता है।

विष्णु सहस्रनाम का पाठ, गीता पाठ, श्रीमद् भागवत पाठ सद्यः सभी लाभकारी होता है। 27 सितम्बर रविवार को प्रतिपदा श्राद्ध, 28 सितम्बर सोमवार द्वितीया श्राद्ध, 29 सितंबर मंगलवार तृतीया श्राद्ध भरणी नक्षत्र श्राद्ध, 30 सितंबर बुधवार चतुर्थी तिथि श्राद्ध, 1 अक्टूबर बृहस्पतिवार पंचमी तिथि श्राद्ध, 2 अक्टूबर शुक्रवार षष्ठी तिथि श्राद्ध तथा सप्तमी तिथि श्राद्ध, 3 अक्टूबर शनिवार को अष्टमी तिथि का श्राद्ध तथा जिवत्पुत्रिका व्रत, 4 अक्टूबर रविवार को मातृनवमी श्राद्ध तथा जिवत्पुत्रिका व्रत का पारण प्रातः 7 बजकर 27 मिनट के बाद किया जायेगा ।

 5 अक्टूबर सोमवार दशमी तिथि श्राद्ध, 6 अक्टूबर मंगलवार एकादशी व्रत एवं एकादशी तिथि का श्राद्ध,7 अक्टूबर बुधवार द्वादशी तिथि का श्राद्ध, 8 अक्टूबर बृहस्पतिवार त्रयोदशी तिथि श्राद्ध, प्रदोष व्रत, मासशिवरात्रि व्रत, 9 अक्टूबर शुक्रवार चतुर्दशी तिथि श्राद्ध, शस्त्रादि हतानाम श्राद्ध, 10 अक्टूबर शनिवार को स्नान दान श्राद्ध की अमावस्या, सर्वपैत्री अमावस्या, पितृविसर्जन, महालय की समाप्ति का दिन हैं। जिसका तिथि ज्ञात न हो तो अमावस के दिन ही श्राद्ध करना श्रेयष्कर होता है। अमावस के दिन पितरों के विदाई निमित्त ब्राह्मण भोजन इत्यादि कराकर दान पुण्य करना चाहिए ।

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