इलाहाबाद का छात्र सरकार की गलतफहमियां दूर करेगा


प्रयागराज,(दिनेश तिवारी)  आईसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा ने कहा. वर्दी पहनने वाले लोग ही कानून.व्यवस्था को तार-तार कर रहे हैं, तो अपराध के आंकड़े कैसे दर्ज होंगे। जिन्होंने अपने हकों के लिए जंतर.मंतर तक आंदोलन कियाए जेल गए और पुलिस का दमन झेला। आने वाले एक साल में उत्तर प्रदेश और इलाहाबाद का छात्र.नौजवान सरकार की तमाम गलतफहमियां दूर कर देगा।

             सिविल लाइंस स्थित धरना स्थल पर बुधवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईसा) के बैनर तले " जेन राइजिंग महाजुटान " का आयोजन किया गया। इस दौरान आईसा ने भर्तियों में हो रहे कथित भ्रष्टाचार के विरोध में छात्रों को एकजुट होने का आह्वान किया।

       उन्होंने कहा कि  जेन राइजिंग महाजुटान" यात्रा इलाहाबाद से शुरू होकर वाराणसी, आजमगढ़, गोरखपुर, फैजाबाद , रायबरेली , लखनऊ , अलीगढ़ में 18 सितंबर को समाप्त होगी। यह यात्रा केवल संघर्षों को मजबूत करने, सॉलिडेरिटी और सपोर्ट देने के लिए है। 

            आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा ने कहा. जिस इलाहाबाद विश्वविद्यालय को कभी  "ऑक्सफोर्ड " से तुलना दी जाती थी, वहीं आज छात्रों के निलंबन , फीस वृद्धि और स्कॉलरशिप मांगों पर दमन की खबरें आम हैं। उन्होंने मनीष और रोशन समेत कई निलंबित छात्रों के साथ सॉलिडेरिटी जताई और पूछा कि यदि विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक छात्र संघ चुनाव हों तो सरकार को क्या परेशानी है।

            उन्होंने कहा. यात्रा के एजेंडे में परीक्षा प्रबंधन के लगातार बिगड़ते हालात भी प्रमुख हैं। यूपीएसआई , लेखपाल,  नीट और 12वीं जैसी बड़ी परीक्षाओं में   " नोटिफिकेशन देरी , पेपर लीक, और टेक्निकल ग्लिच की श्रृंखला की ओर इशारा कियाए जिससे सरकारी नौकरी के छात्रों के सपने ध्वस्त हो रहे हैं। साथ ही नई नियमावली में बार.बार बदलाव और पुरानी नियमावली वापसी की मांग को भी यात्रा का हिस्सा बताया।

      नेहा ने उत्तर प्रदेश में करीब 26 हजार सरकारी स्कूलों के बंद होने पर सवाल उठाए और इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति  के दबाव से जोड़ा। उनका कहना है कि गरीब , दलित.मुस्लिम तबके और महिला छात्राओं को प्राथमिक शिक्षा से महरूम किया जा रहा है , इसलिए हम इस आंदोलन में आए हैं।

       लखनऊ के इको गार्डन से शुरू हुए आह्वान के बाद उत्तर प्रदेश में छात्र आंदोलन पर दमन की श्रृंखला का जिक्र किया। दावा किया गया कि मनीष के घर के बाहर पुलिस पहुंची, कई छात्र नेताओं को हाउस अरेस्ट किया गयाए एक को ट्रेन से उतारा गयाए और सुफियान , वैस और संदीप नामक तीन छात्रों को 18 दिन तक गैरकानूनी हिरासत में रखा गया। छात्रों ने इन मामलों में जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

         महिला अपराधों का जिक्र करते हुए नेहा ने कहा. 2024 के सरकारी आंकड़ों का हवाला दिया और दावा किया कि यूपी में 66 हजार महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामले दर्ज हुए हैं। हाथरस में प्रशासन ने अपराधियों को बचाने की कोशिश की। रेप पीड़िता , जिनसे जंतर.मंतर पर मिले हैं , उसके साथ में खड़े होने के बजाय आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर को बार.बार संरक्षण दिया गया।

         बदायूं में 50 साल की महिला के साथ रेप होता है और आईआईटी बीएचयू  में एक स्टूडेंट के साथ गैंगरेप करते हैं, कुछ लड़के और जब उसकी तहकीकात होती हैए तो पता चलता है कि वो युवक भी इसी सरकार से आते हैं।

          "ज़ीरो टॉलरेंस" नीति पर सवाल खड़े करते हुए छात्रा नेता ने कहा कि जब वर्दी पहनने वाले लोग ही कानून.व्यवस्था को तार.तार कर रहे हैंए तो अपराध के आंकड़े कैसे दर्ज होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि करछना में पुलिस ने 80 दलित युवकों से उनका नाम और जाति पूछकर उन्हें गिरफ्तार किया और हफ्तों जेल में बंद रखकर उनके साथ हिंसा की।

       कार्यक्रम में आईसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहाए यूपी के अध्यक्ष मनीष जेएनयूएसयू की सह सचिव दानिश अलीए एयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष के के राय मौजूद रहे।

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