फिर बढ़ेगी दिव्यांगजन की पेंशन धनराशि: योगी
गोरखपुर, 30 सितंबर (वार्ता) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिव्यांगजन की पेंशन धनराशि में जल्द ही फिर वृद्धि किए जाने की घोषणा की और उन्होंने सभी 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के भी निर्देश दिए हैं।योगी ने बुधवार को सिविल लाइंस स्थित गोरखपुर क्लब में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को संबोधित करते हुये कहा कि किसी भी समाज की प्रगति और असली पहचान ऊंची इमारतों से नहीं होती। समाज की प्रगति उस व्यवस्था में होती है, जहां शासन की योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव, अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक मजबूती से पहुंचता है। यही सुशासन का पहला सूत्र है। उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार इसी सूत्र पर कार्य कर रही है।
इस अवसर पर उन्होंने 509 लाभार्थियों को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, ई-ट्राइसाइकिल, स्मार्टफोन, स्मार्टकेन, ब्रेल किट सहित विभिन्न प्रकार के 664 सहायक उपकरणों का वितरण किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासन प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूर्ण करने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में 12 वर्षों में देश में बिना भेदभाव शासन की योजनाओं का समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्तियों तक पहुंचा है। डबल इंजन सरकार ने किसी भी योजना में व्यक्ति, मत, मजहब, क्षेत्र, भाषा आदि का कभी भेदभाव नहीं किया। सिर्फ एक लक्ष्य रहा- सबका साथ और सबका विकास। सबका विश्वास और सबका प्रयास।
मुख्यमंत्री कहा कि भारतीय संस्कृति में कहा गया है, 'अयोग्यो पुरुषो नास्ति'। यानी, हमारी संस्कृति में किसी भी व्यक्ति को अधूरा नहीं माना गया है। भारतीय मनीषा कहती है कि कोई भी व्यक्ति अयोग्य नहीं होता। अगर कोई किसी को अयोग्य कहता है तो इसका मतलब यह है कि कोई योजक नहीं है। जब देश में प्रधानमंत्री मोदी जी जैसा योजक है तो कोई अयोग्य कैसे रह सकता है। उनके नेतृत्व में जरूरतमंदों को आवास, शौचालय, रसोई गैस कनेक्शन, पेंशन, युवाओं को रोजगार-नौकरी उपलब्ध कराई गई। केंद्र व प्रदेश की डबल इंजन सरकार का लक्ष्य हर व्यक्ति का स्वावलंबन और सबके जीवन में खुशी लाना है।
योगी ने दिव्यांगजन कल्याण के लिए किए गए कार्यों का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा कि जल्द ही उनकी पेंशन धनराशि में एक बार फिर वॄद्धि की जाएगी। पहले दिव्यांगजन को 300 रुपये पेंशन मिलती थी। सरकार ने इसे पहले 500 और फिर 1000 रुपये किया। अब कुछ दिनों में इसमें फिर बढ़ोतरी की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। गोरखपुर में सीतापुर आई हॉस्पिटल परिसर में यह केंद्र शुरू हो चुका है। उन्होंने गोरखपुर में स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालक एवं बालिका इंटर कॉलेज, संकेत राजकीय मूकबधिर विद्यालय, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोविकास केंद्र और राजकीय कौशल विकास केंद्र का उल्लेख किया। कहा कि नॉर्मल कैंपस में आश्रय एवं प्रशिक्षण केंद्र, छात्रावास और बचपन डे केयर सेंटर भी संचालित हैं।
योगी ने कहा कि वर्ष 2026-27 में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में शिविर लगाकर पेंशन से छूटे दिव्यांगजनों को योजनाओं से जोड़ने का लक्ष्य है। प्रदेश में 17 लाख से अधिक दिव्यांगजनों की डिजिटल पहचान मजबूत कर उन्हें कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं।
दिव्यांगजन सशक्तीकरण की शुरुआत बचपन से होनी चाहिए। शुरुआती जांच, थेरेपी, अभिभावकों को मार्गदर्शन, विशेष शिक्षा और तकनीकी सहायता पर सरकार का जोर है। इसी क्रम में तीन से सात वर्ष के श्रवणबाधित, दृष्टिबाधित और बौद्धिक दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए बचपन डे केयर सेंटरों का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने दिव्यांगजनों को सीएम युवा, पीएम स्वनिधि, ओडीओपी, पीएम विश्वकर्मा, पीएम मुद्रा और स्टैंडअप जैसी योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया। साथ ही बताया कि प्रदेश सरकार कॉक्लियर इंप्लांट पर छह लाख रुपये तक के खर्च के साथ स्पीच थेरेपी में भी सहयोग करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शारीरिक चुनौती प्रतिभा की राह में बाधा नहीं बन सकती। प्रतिभा को दया नहीं, अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। सही साधन और प्रशिक्षण मिले तो प्रतिभा अपनी क्षमता की ऊंचाई तक पहुंच सकती है। उन्होंने महान ऋषि अष्टावक्र, महाकवि सूरदास, संगीतकार रवींद्र जैन और पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा के साथ पैरालंपिक खिलाड़ियों दीपा मलिक, सुहास एलवाई, सुमित अंतिल, देवेंद्र, भाविना पटेल, वैभव गौतम, प्रवीण कुमार, प्रीति पाल आदि का उदाहरण देते हुए कहा कि पदक केवल मजबूत भुजाओं से नहीं, बल्कि मजबूत हौसले से जीते जाते हैं। इन खिलाड़ियों ने साबित किया कि प्रतिभा को दया नहीं, अवसर चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2015 में 'विकलांग' के स्थान पर 'दिव्यांग' शब्द का प्रयोग कर समाज की 'दृष्टि' बदलने का प्रयास किया। यह दृष्टि बताती है कि डबल इंजन सरकार दिव्यांगजन को अधिकार और सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दृष्टि से ब्रेल व ऑडियो सूचना, टैक्टाइल पाथ, सुलभ डिजिटल सेवाएं, सांकेतिक भाषा, कैप्शन और विजुअल अलर्ट जैसी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा को सशक्तीकरण का सबसे बड़ा माध्यम बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां दिव्यांगजन के लिए दो विश्वविद्यालय संचालित हैं। लखनऊ में डॉ. शकुंतला मिश्रा दिव्यांगजन सशक्तीकरण विश्वविद्यालय और चित्रकूट में जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय कार्य कर रहे हैं।
कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में साढ़े नौ वर्षों के दौरान दिव्यांगजन के जीवन में अभूतपूर्व बदलाव आया है। उन्होंने दिव्यांगजन से जुड़ी हर योजना के लिए समुचित बजट देकर अपनी संवेदनाएं दिखाई हैं। पीडीए का ढिंढोरा पीटने वाली सपा जब सत्ता में थी तब दिव्यांगजन विभाग का बजट महज 665 करोड़ रुपये था। जबकि सीएम योगी की उदारता से वर्ष 2026-27 में यह बजट 2200 करोड़ रुपये हो गया है। मुख्यमंत्री ने राज्य की 25 करोड़ जनता का जीवन उन्नत करने के साथ ही दिव्यांगजन के जीवन को सशक्त करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। अखिलेश यादव की सरकार में दिव्यांगजन को भरण पोषण के लिए मात्र 300 रुपये दिया जाता था, इसे बढ़ाकर 1000 रुपये करने का काम सीएम योगी ने किया है। उन्होंने दिव्यांग बच्चियों की यात्रा सुगम बनाने के लिए ई-स्कूटी के लिए 60 करोड़ रुपये दिए हैं। प्रदेश में 55 बचपन डे केयर संचालित है, जबकि 28 और खुलने वाले हैं।
इस अवसर पर जिले के प्रभारी मंत्री एवं प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मत्स्य विभाग के मंत्री संजय निषाद, प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह, जिला पंचायत की प्रशासक साधना सिंह, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, श्रीराम चौहान, राजेश त्रिपाठी, महेंद्रपाल सिंह, विपिन सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एसपी मोहंती, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। स्वागत संबोधन भाजपा के महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता ने किया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिव्यांगजन को करीब सवा करोड़ रुपये के सहायक उपकरण उपलब्ध कराए। इसमें 127 दिव्यांगजन को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, 25 को ई-ट्राइसाइकिल, 70 को ट्राइसाइकिल, 155 दिव्यांगजन को 319 स्मार्ट केन एवं ब्रेल किट, 90 को हियरिंग एड, 5 को स्मार्टफोन, 1 को ब्रेल लिपि की गीता, 1 को ब्रेल लिपि की रामचरितमानस, 10 को कृत्रिम अंग, 20 को वयोश्री योजना का लाभ और 5 दिव्यांगों को पाठ्य पुस्तकों का वितरण किया गया।

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