चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल लोकतंत्र के लिये घातक संकेत: अखिलेश
लखनऊ 23 सितम्बर (वार्ता) समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों से साबित होता है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शासनकाल में संवैधानिक संस्थायें निष्पक्ष नहीं रह गयी हैं। यह लोकतंत्र के लिए घातक संकेत है। श्री यादव ने बुधवार को यहां एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि चुनाव आयोग पर जिस तरह के सवाल उठ रहे हैं उससे लगता है कि इनके कार्यकाल में जितने चुनाव हुए है वे निष्पक्ष नहीं है। सत्ता में बने रहने के लिए संविधान की धज्जियां उड़ायी गई है। भविष्य के चुनाव भी इनके नेतृत्व में नहीं होने चाहिए। उन्होने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त गलत फैसलों के खिलाफ दस महीनों में 14 बार नोट लिखकर अपनी शिकायत और आपत्ति दर्ज करायी है। यह बेहद गंभीर है कि मुख्य चुनाव आयोग के फैसलों के खिलाफ अन्य चुनाव आयुक्तों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज करायी है। इसका मतलब है कि सभी चुनाव आयोग अपना सही काम निष्पक्ष तरीके से नहीं कर रहे हैं। एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर अपना काम न्यायपूर्ण तरीके से करने की स्वतंत्रता नहीं है, या उनकी कोई सुनवाई नहीं है यह बेहद घातक है।सपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा सरकार में संस्थाएं निष्पक्ष नहीं रह गयी है। चुनाव किसके इशारे पर इस तरह का काम कर रहा है। श्री यादव ने कहा, " हम लोग उम्मीद करते है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष संस्था है, ये लोकतंत्र को मजबूत करेगा लेकिन आयोग तो लोकतंत्र को ही खत्म कर रहा है। चुनाव आयोग पूरी तरह से एक्सपोज हो गया है उसके साथ ही भाजपा सरकार भी एक्सपोज हो गयी है। लोकतंत्र में कठपुतली बनकर धोखा देना घोर संवैधानिक अपराध है। यह लोकतंत्र खत्म करने का षड्यंत्र है। आने वाले समय में जनता अपने वोट से भाजपा सरकार को हमेशा के लिए हटा देगी। जनता भाजपा सरकार और चुनाव आयोग को जवाब देने जा रही है।"
श्री यादव ने कहा कि 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग के अधिकारियों ने जानबूझ कर सपा समर्थक मतदाताओं को चिन्हित कर वोटर लिस्ट से हटा दिया है। इसके बाद जब चुनाव आयोग से सपा को नोटिस दिया तो हम लोगों ने चुनाव आयोग को बड़ी संख्या में वोटरों के शपथपत्र दिये, जानकारी दी लेकिन एक भी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई। उसके बाद जब यूपी में मीरापुर, कुन्दरकी, कानपुर, करहल, कटेहरी, मिल्कीपुर उपचुनाव हो हर जगह धांधली और बेईमानी हुई। चुन-चुन कर अधिकारी तैनात किए गए थे। उपचुनाव में वोटों की लूट हुई लेकिन आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की।
उन्होने कहा कि सभी लोगों ने देखा कि एसआईआर के बाद बिहार का चुनाव किस तरह से हुआ। यूपी के उपचुनाव में लूट का जो मॉडल अपनाया गया था वहीं मॉडल बंगाल के चुनाव में विस्तार करके लागू किया गया। पश्चिम बंगाल में तीन लाख केन्द्रीय फोर्स लगाकर चुनाव लूट लिया। यूपी में एसआईआर में घपलेबाजी हो रही थी। लखनऊ में एक ही व्यक्ति के फर्जी हस्ताक्षर से प्रिन्टेड फार्म के जरिए सौ लोगों के वोट काटने की साजिश हुई। सुल्तानपुर में जो नंदलाल निषाद हस्ताक्षर नहीं कर पाते उनके नाम से बड़े लोगों को वोट काटने का प्रयास हुआ। चुनाव आयोग को लेकर तमाम खामियां है।
श्री यादव ने कहा कि अब सब कुछ सामने आ चुका है। सरकार में रहने के लिए चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के साथ कौन खिलवाड़ कर रहा है। इसका मतलब है कि इस दौरान जो सरकारें बनी है उन्होंने लोकतंत्र की धज्जियां उड़ायीं हैं। 2022 में समाजवादी पार्टी को विधानसभा चुनाव साजिश करके हराया था। यह लोग फिर बड़े पैमाने पर बेइमानी की तैयारी कर रहे होंगे। हम लोगों ने इन्हे एसआईआर में बेईमानी करते पकड़ा था। अभी भी मनमर्जी से अधिकारी तैनात किए जा रहे हैं। जो अधिकारी आने वाले समय में विधानसभा का चुनाव देखेंगे उनके एक भी पीडीए वर्ग से नहीं हैं। यह बड़ी साजिश और षडयंत्र हैं।
उन्होने कहा कि ट्रांसफर-पोस्टिंग चुनाव की तैयारी के लिए हो रहे हैं। भाजपा लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है। यूपी का विधानसभा का चुनाव आखिरी चुनाव होगा। इसके बाद भाजपा जनता के वोट का अधिकार छीन लेगी। लोकतंत्र बचाने का एक ही रास्ता है, दिल्ली में पीडीए की सरकार बनाना। एक सवाल में श्री अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा पूरी तरह से एक्सपोज हो गयी है। आने वाले समय में जनता भाजपा को बुरी तरह से हराएगी। वहीं से भाजपा का पतन शुरू हो जाएगा।

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