यूपी के विकास की गूंज अब दुनिया में सुनाई दे रही-पीयूष गोयल
नोएडा, 27 सितंबर (वार्ता) उत्तर प्रदेश अब विकास और निवेश के नए केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है और प्रदेश के विकास की गूंज देश ही नहीं, दुनिया में भी सुनाई दे रही है।यह बात केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित चौथे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) के तीसरे दिन कही।
श्री गोयल ने 'लीवरेजिंग इंडियाज फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स फॉर ग्लोबल बिजनेस ग्रोथ' विषय पर आयोजित विशेष बिजनेस सेशन में मुख्य अतिथि के रूप में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश ने विकास की नई यात्रा तय की है। उद्यमियों का बढ़ता भरोसा, निवेश के नए अवसर और आधुनिक उद्योगों का विस्तार प्रदेश की बदलती तस्वीर को सामने रख रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे, नए एयरपोर्ट, बड़े औद्योगिक पार्क और डिफेंस, सेमीकंडक्टर तथा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आधुनिक क्षेत्रों में निवेश हो रहा है। नोएडा के निकट विकसित हो रही रोबोटिक्स फैक्ट्री का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश अब भविष्य के उद्योगों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
उन्होंने कहा कि विकास की अगली मंजिल अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निर्यात, विदेशी निवेश और पर्यटन से जुड़ी है। उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पाद और ब्रांड अब वैश्विक बाजारों में पहचान बना रहे हैं।सरकार ने वर्ष 2030 तक उत्तर प्रदेश के निर्यात को पांच लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य प्रदेश की बढ़ती आर्थिक क्षमता और उद्यमियों के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है।
उन्होंने 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश के कारोबारी माहौल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय कानून-व्यवस्था और निवेश के वातावरण को लेकर उद्यमियों में चिंता रहती थी। उनके अनुसार बड़े उद्योगों की स्थापना को लेकर पर्याप्त उत्साह नहीं था और भ्रष्टाचार तथा कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के कारण व्यापार जगत में निराशा का माहौल था। उस समय पलायन की चर्चा आम थी और उत्तर प्रदेश को पिछड़े राज्यों में गिना जाता था। ऐसे माहौल में रोबोटिक्स, डिफेंस कॉरिडोर और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश की कल्पना करना मुश्किल था।
केंद्रीय मंत्री ने 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के संकल्प पत्र की तैयारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों से सुझाव लिए थे। युवाओं, महिलाओं और समाज के विभिन्न वर्गों की आकांक्षाओं को संकलित कर संकल्प पत्र तैयार किया गया।
उन्होंने कहा कि जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए बड़े वित्तीय संसाधनों की जरूरत थी। सीमित बजट के बावजूद विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने पर जोर दिया गया। उत्तर प्रदेश ने विकास के साथ राजस्व संग्रह में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने दावा किया कि 2016-17 की तुलना में प्रदेश के आबकारी राजस्व में करीब पांच गुना वृद्धि हुई है।
उन्होंने भूमि हस्तांतरण, रजिस्ट्रेशन फीस और स्टांप ड्यूटी से मिलने वाली आय का उल्लेख करते हुए कहा कि संसाधन वही रहे, लेकिन व्यवस्था में सुधार से राजस्व संग्रह में बड़ा बदलाव आया।
खनन क्षेत्र का उदाहरण देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 2016-17 में बालू, मौरंग, पत्थर और अन्य खनिजों से करीब 1,548 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। वर्तमान में इस क्षेत्र से होने वाली आय में कई गुना वृद्धि हुई है। राजस्व से सड़क, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हुए हैं।
यूपीआईटीएस को महज ट्रेड फेयर के बजाय उत्तर प्रदेश के कारोबार को वैश्विक बाजार से जोड़ने वाला मंच बताया। उन्होंने कहा कि भारत के विभिन्न देशों के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स से भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार खुले हैं।
उन्होंने प्रदेश के उद्यमियों से इन अवसरों का लाभ उठाने और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने का आह्वान किया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैश्विक बाजार में टिकने के लिए उत्पादों की गुणवत्ता, नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ानी होगी। उन्होंने उद्यमियों से अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने और नए बाजारों में विस्तार करने की अपील की।बेहतर औद्योगिक नीतियों और निवेश के अनुकूल माहौल के चलते उत्तर प्रदेश निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। निवेशक और कारोबारी प्रतिनिधिमंडल लगातार प्रदेश का रुख कर रहे हैं, जिससे निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
कार्यक्रम में प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री भूपेंद्र चौधरी, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, एमएसएमई राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, प्रमुख सचिव एमएसएमई शशि भूषण लाल सुशील, उद्योग आयुक्त के. विजयेंद्र पांडियन और विशेष सचिव एमएसएमई शिशिर समेत अन्य अधिकारी एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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