नेशनल ला यूनिवर्सिटी प्रयागराज में जातिगत भेदभाव का मामला
प्रयागराज , (दिनेश तिवारी) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, में जातिगत भेदभाव के गंभीर आरोपों पर संज्ञान लेते हुए दो अलग-अलग समितियों के गठन का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने यह आदेश शुभेंदु आनंद व अन्य द्वारा दायर याचिका पर पारित किया।
एक याची विश्वविद्यालय में पीएचडी शोधार्थी हैं, जबकि दूसरा बी.ए. एलएलबी (ऑनर्स) पाठ्यक्रम के पांचवें सेमेस्टर का छात्र हैं और वे बॉयज़ हॉस्टल में रहते हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विधि विभाग के अध्यक्ष व हॉस्टल वार्डन ने अपने शैक्षणिक व प्रशासनिक अधिकार का दुरुपयोग कर जातिगत अपमान और प्रतिशोध का हथियार बनाया।
छात्र ने बताया कि संविधानिक विधि-I में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने के बावजूद उन्हें आपत्तिजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा और शक जताया कि उनकी उत्तर-पुस्तिकाओं का मूल्यांकन जाति के आधार पर अधिक सख्ती से किया गया। छात्र ने 20 अगस्त 2026 को कुलपति को शिकायत भेजी थी, लेकिन आरोप है कि कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने आरोपों की सत्यता पर कोई राय नहीं दी है, लेकिन गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच जरूरी है। न्यायालय ने निर्देश दिया कि कुलपति एक स्वतंत्र समिति बनाएंगे जो छात्र की उत्तर-पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन करेगी, जिसमें मूल मूल्यांकनकर्ता की कोई भूमिका नहीं होगी। उत्तर-पुस्तिकाओं की पहचान छुपाकर मूल्यांकन होगा और एक सप्ताह में रिपोर्ट देनी होगी।
लघु वाद न्यायालय की न्यायाधीश अर्चना सिंह-प्रथम और विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अरुण कुमार यादव को जातिगत भेदभाव की शिकायतों की जांच कर रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपने को कहा गया है।
न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि जांच पूरी होने तक विपक्षी संख्या छः को छात्र के मूल्यांकन या अनुशासनात्मक मामलों से दूर रखा जाए और उन्हें सभी प्रशासनिक जिम्मेदारियों से तत्काल मुक्त किया जाए। विश्वविद्यालय को यह भी बताना होगा कि क्या उसके पास यूजीसी नियमों के तहत अनुसूचित जाति/जनजाति छात्रों के लिए समान अवसर प्रकोष्ठ और शिकायत निवारण समिति मौजूद है।
गोपनीयता बनाए रखने और गवाहों की पहचान सुरक्षित रखने के भी निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को होगी।
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