उत्तर प्रदेश में आफत की बारिश,कई कच्चे मकान जमीदोज,फसलों को व्यापक नुकसान
लखनऊ, 26 सितंबर (वार्ता) राजधानी लखनऊ और कानपुर समेत लगभग दो तिहाई उत्तर प्रदेश में पिछले 40 घंटों से रुक रुक कर हो रही बारिश ने जनजीवन अस्तव्यस्त कर दिया है। बारिश से ग्रामीण अंचलों में कई कच्चे मकान ढह गये हैं वहीं फसलों में भी व्यापक नुकसान की संभावना है।मौसम विभाग ने शनिवार को लगभग समूचे प्रदेश में गरज-चमक के साथ बारिश होने का पूर्वानुमान जताया है। पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने तथा झोंकों में इसकी गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।
बारिश के चलते प्रयागराज, कौशांबी,सुलतानपुर और कानपुर समेत कई जिलों प्राथमिक विद्यालयों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। मौसम के रुख में आये परिवर्तन से तापमान में आठ से दस डिग्री तक की गिरावट आने से सर्दी का अहसास होने लगा है। मौसम विभाग ने आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कहीं-कहीं अत्यधिक भारी बारिश और तराई क्षेत्र में एक-दो स्थानों पर असामान्य रूप से भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी और कहीं-कहीं अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है। दोनों अंचलों में कुछ स्थानों पर गरज-चमक और आकाशीय बिजली के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं।
विभाग के अनुसार 27 सितंबर को भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने तथा कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है। इसके बाद 28 और 29 सितंबर को प्रदेश में कहीं-कहीं बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। 30 सितंबर और एक अक्टूबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मौसम शुष्क रहने की संभावना है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है। दो अक्टूबर को दोनों अंचलों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है।
बारिश के कारण व्यापारिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुयी हैं। सड़कों पर वाहनों की संख्या में कमी दर्ज की जा रही है वहीं बाजार और मॉल में सन्नाटा पसरने लगा है। वर्षा प्रभावित जिलों में सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने एडवाइजरी जारी कर लोगों से एहतियात बरतने की अपील की है। इलेक्ट्रिक उपकरणों को गीले हाथ से न छूने, जर्जर मकानों से दूरी बनाये रखने की भी अपील की जा रही है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 26 सितंबर को प्रदेश में औसतन 52.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जबकि सामान्य बारिश 2.7 मिलीमीटर थी। इस तरह प्रदेश में दैनिक बारिश सामान्य से करीब 1845 प्रतिशत अधिक रही। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 59.9 मिलीमीटर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 41.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। जिलावार आंकड़ों में हमीरपुर में 164.8 मिमी, बांदा में 153.1 मिमी, महोबा में 132.3 मिमी, चित्रकूट में 79.1 मिमी, कानपुर नगर में 111.4 मिमी, लखनऊ में 125.1 मिमी, फर्रुखाबाद में 139.4 मिमी, खीरी में 163.9 मिमी और पीलीभीत में 63.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शाहजहांपुर में 162.1 मिमी, जालौन में 85.1 मिमी, औरैया में 72.6 मिमी, एटा में 66 मिमी तथा इटावा में 61.2 मिमी बारिश हुई।
एक जून से 26 सितंबर तक के मानसूनी सीजन में उत्तर प्रदेश में कुल औसत 751.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य वर्षा 738 मिलीमीटर है। इस अवधि में प्रदेश में बारिश सामान्य से दो प्रतिशत अधिक रही। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 771.6 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य 787.9 मिमी के मुकाबले दो प्रतिशत कम है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 723.7 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य 668.1 मिमी से आठ प्रतिशत अधिक है।
जिलों में महोबा में सामान्य से 90 प्रतिशत, हमीरपुर में 81 प्रतिशत, संभल में 79 प्रतिशत, चित्रकूट में 75 प्रतिशत, बांदा में 73 प्रतिशत, कानपुर नगर में 67 प्रतिशत, कन्नौज में 51 प्रतिशत और एटा में 51 प्रतिशत अधिक मौसमी बारिश दर्ज की गई है। इसके विपरीत अमेठी में सामान्य से 38 प्रतिशत, कानपुर देहात में 53 प्रतिशत, जौनपुर में 58 प्रतिशत, भदोही में 60 प्रतिशत, कुशीनगर में 66 प्रतिशत और देवरिया में 73 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है।
बारिश के चलते गंगा यमुना समेत अन्य नदियाें के जलस्तर में बढ़ोत्तरी हुयी है हालांकि लगभग सभी नदियां खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं।
जालौन जिले में लगातार हो रही बारिश से खेतों में खड़ी तिल, उड़द, बाजरा, ज्वार सहित अन्य फसलों को नुकसान होने का दावा करते हुए किसानों ने शासन-प्रशासन से तत्काल सर्वे कराकर शत-प्रतिशत फसल क्षति का मुआवजा दिलाने की मांग की है। किसानों ने फसल बीमा कंपनियों की सर्वे प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कृषि विभाग और जिले के वरिष्ठ अधिकारियों से निगरानी की मांग की है।
किसान अमर सिंह चंदेल ने कहा कि बारिश के कारण जिले के कई क्षेत्रों में फसलें खराब हो चुकी हैं। उन्होंने मांग की कि प्रभावित किसानों की फसल का निष्पक्ष सर्वे कराकर वास्तविक नुकसान के आधार पर 100 प्रतिशत मुआवजा दिया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि फसल बीमा के सर्वे के दौरान किसानों से संबंधित प्रपत्रों पर हस्ताक्षर तो करा लिए जाते हैं, लेकिन नुकसान के अनुपात में क्लेम निर्धारित नहीं किया जाता। उन्होंने इस मामले में कृषि विभाग और उच्च अधिकारियों से विशेष ध्यान देने की मांग की।
हरदोई जिले में पिछले 24 घंटे से लगातार मध्यम गति से हो रही बारिश के चलते को अलग-अलग हादसों में पेड़ और दीवार गिरने से 11 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई, जबकि छह लोग घायल हुए। वहीं बारिश से कमजोर हुई कच्ची दीवार शनिवार तड़के गिरने से चार भैंसों की दबकर मौत हो गई। लगातार बारिश को देखते हुए जिले में कक्षा एक से 12वीं तक के सभी स्कूल शनिवार को बंद रखे गए। वही अब तक जिले में 70 मिलीमीटर लगातार बारिश रिकार्ड शनिवार सुबह छह बजे तक रिकार्ड की गयी है।

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