भारत की विरासत को अपमानित करना एक प्रवृत्ति बन गई थी: योगी
लखनऊ, 14 सितंबर (वार्ता) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक समय भारत की विरासत और सांस्कृतिक पहचान को अपमानित करना एक प्रवृत्ति बन गई थी, लेकिन आज देश अपनी विरासत के सम्मान के साथ विकास की नई गाथा लिख रहा है। 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना के अनुरूप देश की विकास यात्रा को आगे बढ़ाया जा रहा है।मुख्यमंत्री योगी लखनऊ में उत्तर प्रदेश के लोक आयुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस समारोह में सम्मिलित होते हुए यह बातें कहीं। उन्होने कहा कि गांव की सड़क हो या शहर की सड़क, रेलवे का विस्तार हो या एक्सप्रेसवे का निर्माण, ये सभी नए भारत की पहचान बन रहे हैं। अयोध्या जैसी धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी आज रेल की दोहरी लाइन से जुड़ चुकी है। बुनियादी ढांचे के विकास ने देश और प्रदेश में आवागमन को आसान बनाने के साथ विकास की गति को भी तेज किया है।
योगी ने कोरोना महामारी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने संकट के समय आत्मनिर्भरता का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि जब वह सांसद थे, तब पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी। इंसेफेलाइटिस की वैक्सीन के लिए दुनिया को करीब 100 वर्ष इंतजार करना पड़ा, जबकि कोरोना महामारी के दौरान भारत में पहली बार महज नौ माह में वैक्सीन का उत्पादन शुरू हो गया।
उन्होंने कहा कि भारत ने अपने नागरिकों को मुफ्त कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराई और कई देशों को भी मुफ्त वैक्सीन भेजकर वहां के लोगों की जान बचाने में मदद की। मुख्यमंत्री ने इसे नए भारत की क्षमता और आत्मविश्वास का उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा कि गरीबों के लिए आवास उपलब्ध कराने की दिशा में भी बड़े स्तर पर काम हुआ है। भाजपा सरकार के कार्यकाल में चार करोड़ आवास उपलब्ध कराने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विकास का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने देश की सांस्कृतिक विरासत के संदर्भ में सोमनाथ मंदिर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को आमंत्रित किया गया था। योगी ने कहा कि उस समय तत्कालीन कांग्रेस सरकार की ओर से राष्ट्रपति के कार्यक्रम में शामिल होने पर आपत्ति जताई गई थी और इसे भारत के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के विपरीत बताया गया था।
योगी ने कहा कि इन आपत्तियों के बावजूद तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद सोमनाथ मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि उस अवसर पर राष्ट्रपति का दिया गया उद्बोधन आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणादायी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान और आधुनिक विकास साथ-साथ चलना ही नए भारत की पहचान है।

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