किराए के मकान में दुर्घटनावश मौत पर मकान मालिक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता : उच्च न्यायालय
प्रयागराज, (दिनेश तिवारी) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि किराए के मकान में रह रहे किराएदार की दुर्घटनावश मौत पर मकान मालिक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसके लिए अभियोजन को उसके खिलाफ विशिष्ट लापरवाही या चूक का प्रथम दृष्टया साक्ष्य देना होगा कि वह लापरवाही या चूक ही मृत्यु का कारण बनी।
न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने मकान मालिक अवधेश सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।
याची के खिलाफ कानपुर नगर के काकादेव थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। उसके मकान में छात्र आठ माह से किराए पर रह कर आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था। छात्र किराए पर कमरा लेकर रह रहा था। एक दिसंबर 2025 को सुबह वह अपने कमरे के बाथरूम में मृत पाया गया। याची ने इसकी सूचना पुलिस व परिवार को दी।
पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। बिसरा सुरक्षित रखा गया। पुलिस ने बाथरूम में लगे गैस गीजर से कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के रिसाव से दम घुटने से मौत की आशंका जताई। इस आधार पर लापरवाही से मौत का आरोप लगाते हुए चार्जशीट दाखिल की गई। ट्रायल कोर्ट ने याची को समन जारी किया। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
याची के अधिवक्ता का तर्क था कि छात्र की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन इसके लिए याची जिम्मेदार नहीं है। बाथरूम में गैस गीजर लगा था, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि गीजर सुरक्षा मानकों के खिलाफ लगाया गया था। न तो यह आरोप है कि गीजर खराब था और याची को इसकी जानकारी थी। न ही यह कहा गया कि किराएदार ने गैस रिसाव की शिकायत की और याची ने उसे ठीक नहीं कराया। केवल अनुमान के आधार पर याची को जिम्मेदार ठहराया गया है।
न्यायालय ने कहा कि केवल इसलिए कि किराएदार की मृत्यु याची के मकान में हुई, उसे आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अभियोजन को यह दिखाना होगा कि याची की कोई विशिष्ट चूक या लापरवाही थी जो मृत्यु का कारण बनी। इस मामले में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है।
न्यायालय ने कहा कि केवल अंदाजे पर आपराधिक मामला नहीं चल सकता। छात्र की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इस आधार पर याची को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। न्यायालय ने याची के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।
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