मोदी का जल प्रबंधन में एआई के इस्तेमाल पर जोर, ‘जल उत्सव’ को बढ़ावा देने का आह्वान
नयी दिल्ली, 02 सितंबर (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जल क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के बेहतर प्रबंधन, विश्लेषण और प्रभावी इस्तेमाल के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग पर जोर देते हुए कहा है कि पानी से संबंधित आंकड़ों को एकीकृत कर ज्यादा व्यवस्थित बनाने की जरूरत है ताकि जल प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।श्री मोदी ने जल शक्ति मंत्रालय के दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए बुधवार को यहां कहा कि एआई के माध्यम से समान प्रारूप में जल संबंधी आंकड़ों का संग्रह और विश्लेषण किया जा सकता है। उन्होंने कृषि और औद्योगिक जरूरतों के लिए उपचारित पानी के समुचित उपयोग के लिए पहले से तैयारी कर एकीकृत योजना बनाने पर भी जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने शिखर सम्मेलन से निकले कार्यान्वयन योग्य और समयबद्ध कार्य बिंदुओं की लगातार समीक्षा और उनके फॉलो-अप की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन केवल एक बार होने वाली गतिविधि तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि इसकी समीक्षा और सीखने की प्रक्रिया लगातार जारी रहनी चाहिए।
उन्होंने जल संरक्षण में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए ‘जल उत्सव’ को बढ़ावा देने का भी सुझाव दिया और कहा कि गाद निकालने के काम को नियमित कार्यक्रम बनाने और इसके लिए स्पष्ट नियम तथा मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने पानी बचाने वाली तकनीकों को अधिक से अधिक अपनाने और इस क्षेत्र में इस्तेमाल हो रहे दुनिया के बेहतर तौर-तरीकों से सीख लेने की आवश्यकता की बात करते हुए जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों के बीच अंतरराज्यीय अध्ययन-दौरे आयोजित करने का सुझाव दिया ताकि विभिन्न राज्यों में अपनाए जा रहे सफल उपायों को दूसरे क्षेत्रों में भी लागू किया जा सके।
उन्होंने तेजी से हो रहे शहरीकरण और भविष्य में पानी की जरूरतों को देखते हुए शहरी स्थानीय निकायों को भी जल प्रबंधन के प्रति तैयार करने की जरूरत पर बल दिया और कहा कि बांधों की सुरक्षा के लिए हर मानसून से पहले पूरी तैयारी रखने और स्कूली छात्रों में जल संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाई जानी चाहिए।
जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने सम्मेलन के चार प्रमुख परिणामों का उल्लेख करते हुए जल ढांचागत परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने, जल संरक्षण को जन आंदोलन के रूप में मजबूत करने, पेयजल स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा गांवों में पेयजल योजनाओं के प्रभावी संचालन एवं रखरखाव को संस्थागत रूप देने पर जोर दिया।

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