छात्र असंतोष पर सरकार की नजर: शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण पर जोर
विद्या शंकर राय
लखनऊ, 25 सितंबर (वार्ता) उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार ने विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में छात्र असंतोष तथा कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों की निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है। उच्च शिक्षा विभाग अब राज्य विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध डिग्री कॉलेजों की गतिविधियों और छात्र शिकायतों की हर सप्ताह समीक्षा करेगा।
विभागीय सूत्रों की मानें तो सरकार का जोर इस बात पर है कि छात्रों की छोटी शिकायतें समय रहते सामने आएं और उनका निस्तारण किया जाए, ताकि वे बड़े आंदोलन या कानून-व्यवस्था की समस्या का रूप न ले सकें।
सूत्रों का कहना है कि इसके तहत विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और डिग्री कॉलेजों के प्राचार्यों को परिसर में उत्पन्न होने वाले विवादों पर तत्काल ध्यान देने के निर्देश दिए जाएंगे।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, "साप्ताहिक समीक्षा के दौरान छात्रों से जुड़े प्रशासनिक विवाद, शुल्क वृद्धि, परीक्षा एवं कक्षाओं के कार्यक्रम, छात्र सुविधाओं तथा अन्य ऐसे मुद्दों की जानकारी ली जाएगी, जिनसे परिसर में असंतोष पैदा हो सकता है। विश्वविद्यालय प्रशासन को स्थानीय प्रशासन के साथ भी समन्वय रखने के लिए कहा जाएगा।"
यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हाल में जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के बाद सामने आई है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा था कि वे अपने-अपने जिलों में छोटी से छोटी घटना पर भी नजर रखें और किसी मामले को अनावश्यक रूप से बड़ा रूप लेने से पहले मौके पर पहुंचकर लोगों की शिकायत सुनें।
उन्होंने कहा था कि कुछ लोग समाज में वैमनस्य फैलाने के लिए छोटी घटनाओं को बड़ा रूप देने का प्रयास करते हैं। ऐसे में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक स्वयं छोटी घटनाओं की निगरानी करें, पीड़ितों की शिकायत सुनें और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें।
अधिकारी ने बताया कि, "उच्च शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था के तहत विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्र विवादों और शिकायतों की जानकारी नियमित रूप से साझा किए जाने की उम्मीद है। उद्देश्य यह है कि स्थानीय स्तर पर उत्पन्न होने वाले छात्र विवाद व्यापक विरोध-प्रदर्शन का रूप न लें।"
दरअसल हाल में लखनऊ विश्वविद्यालय में पांच छात्रों के निलंबन से जुड़ा विवाद भी सामने आया था। छात्राओं से संबंधित एक मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद निलंबित छात्रों के समर्थकों ने परिसर में तोड़फोड़ की थी। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित छात्रों को आंतरिक शिकायत समिति के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर दिया था।
अधिकारियों का मानना है कि विश्वविद्यालयों में शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था और प्रशासन की समयबद्ध प्रतिक्रिया से छात्र असंतोष को बढ़ने से रोका जा सकता है। विधानसभा चुनाव से पहले सरकार की प्राथमिकता शैक्षणिक परिसरों में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की है।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें