राम मंदिर के पहले सीईओ के चयन पर उठे नए सवाल, अमिताभ ठाकुर ने ट्रस्ट से मांगा स्पष्टीकरण


लखनऊ, 14 सितंबर (वार्ता) राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के चयन को लेकर पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने एक बार फिर सवाल उठाए हैं। ठाकुर स्वयं भी सीईओ पद के आवेदकों में शामिल रहे हैं।

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भेजे पत्र में अमिताभ ठाकुर ने पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पाण्डेय के हालिया सार्वजनिक पॉडकास्ट में दिए कथित बयान का हवाला दिया है। अमिताभ ठाकुर के अनुसार, राजेश पाण्डेय ने कहा है कि सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेन्द्र मिश्रा अंतिम चरण के 16 उम्मीदवारों में शामिल नहीं थे और उन्होंने साक्षात्कार में हिस्सा नहीं लिया था। पाण्डेय ने यह भी कहा कि एक समय उन्हें अपना चयन लगभग निश्चित लग रहा था, लेकिन बाद में निर्णय बदल गया।

श्री ठाकुर का कहना है कि यदि राजेश पाण्डेय का यह बयान सही है तो इससे केवल अंतिम नियुक्ति ही नहीं, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उनका मुख्य सवाल है कि यदि जितेन्द्र मिश्रा निर्धारित अंतिम चरण में शामिल नहीं हुए थे, तो उनका नाम अंतिम तीन उम्मीदवारों में किस आधार पर शामिल किया गया और उनके चयन का आधार क्या था। उन्होने ट्रस्ट से चयन प्रक्रिया से संबंधित तथ्यों और निर्णय का स्पष्ट एवं संतोषजनक स्पष्टीकरण देने की मांग की है।

साथ ही, यदि निर्धारित प्रक्रिया से किसी प्रकार का विचलन हुआ हो तो आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करने को कहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ट्रस्ट की ओर से संतोषजनक जवाब और आवश्यक कार्रवाई नहीं की जाती है तो वह चयन प्रक्रिया और नियुक्ति को उचित न्यायिक अथवा वैधानिक मंच के समक्ष चुनौती देने समेत उपलब्ध सभी कानूनी उपाय अपनाएंगे।

अमिताभ ठाकुर ने कहा कि इस मामले में चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के पालन को स्पष्ट किया जाना जरूरी है।

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