यमुना एक्सप्रेस-वे हादसे का उच्च न्यायालय ने लिया संज्ञान , कहा.स्लीपर बसों की रात में की जाए जांच
प्रयागराज,(दिनेश तिवारी) यमुना एक्सप्रेस-वे पर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए रात में बसों की विशेष जांच के के निर्देश दिए।
न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने अधिकारियों को बसों की नियमित जांच तेज करने और विशेष रूप से रात में निरीक्षण करने का निर्देश दिया है।
न्यायालय ने रात में बसों की विशेष जांच के साथ सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले चालक, परिचालक और लाइसेंसधारक के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
उच्च न्यायालय ने मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और परिवहन विभाग के अपर मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से तलब कर घटना और उसके बाद की गई कार्रवाई की जानकारी ली। न्यायालय ने ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (एआईएस) का भी उल्लेख किया। इसके अनुसार स्लीपर बसों में चालक के केबिन और यात्रियों के हिस्से के बीच विभाजनए बस की ऊंचाईए आपातकालीन निकास द्वारों की संख्या और गलियारे के आकार से संबंधित तकनीकी मानकों का पालन किया जाना चाहिए।
न्यायालय ने कहा कि स्वचालित आग बुझाने की व्यवस्था और यात्रियों के केबिन में आग पर काबू पाने के लिए उपयुक्त प्रणाली का भी प्रावधान होना चाहिए। चालक की नींद का पता लगाने वाली प्रणाली का उल्लेख भी मानकों में किया गया है। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों को चालक, परिचालक और बस के लाइसेंसधारक के खिलाफ उचित कार्रवाई करनी होगी।
मुख्य सचिव ने न्यायालय को आश्वस्त किया कि वह मामले को व्यक्तिगत रूप से देखेंगे। बसों की संयुक्त जांच कराई जाएगी और रात में विशेष निरीक्षण किया जाएगा।न्यायालय ने संबंधित विभाग को हलफनामा दाखिल कर पिछले तीन वर्षों में प्रदेश से स्लीपर बसों को जारी किए गए परमिटों की संख्या बताने का निर्देश दिया है। अन्य कई जानकारी भी मांगी है। अगली सुनवाई 13 अक्तूबर 2026 को होगी। उस दिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।
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