कर्ज, निवेश, बीमा क्षेत्र के लिए भी विकसित की जाए यूपीआई जैसी प्रणाली: मोदी


मुंबई, 08 सितंबर (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की डिजिटलीकृत भुगतान प्रणाली यूपीआई को बैंकिंग व्यवस्था का कायाकल्प करने वाली वित्तीय प्रौद्योगिकी बताते हुए मंगलवार को कहा कि भारतीय फिनटेक उद्योग को कर्ज, निवेश और बीमा क्षेत्र के लिए भी ऐसे ही नवाचार करने चाहिए।

उन्होंने घरेलू फिनटेक उद्योग से कार्ड से भुगतान के भारतीय नियम और मानकों का विकास करने का भी आह्वान किया जो अभी विदेशों में विकसित मानकों को पर चल रहे हैं। प्रधानमंत्री ने फिनटेक कंपनियों के सामने चार सूत्री दायित्व रखा है जिसमें साइबर सुरक्षा को उच्चतम कोटि का बनाने; डाटा संरक्षण के नैतिक मानक अपनाने; फिनटेक उद्योग, विनियामक और नवाचार का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने और कंपनियों के प्रदर्शन को मापने के लिए एक फिनटेक उपभोक्ता संरक्षण सूचकांक बनाने का दायित्व शामिल है।
श्री मोदी ने यहां तीसरे वैश्विक फिनटेक सम्मेलन को संबोधित करते हुए यूपीआई क्रांति का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "आपने भुगतान के मामले में अपनी गति और अपना कौशल दिखा दिया है, अब बचत, निवेश और बीमा जैसे गैर-भुगतान क्षेत्रों के लिए भी अपना कौशल दिखाने के लिए आगे आएं ताकि इन क्षेत्रों में लोगों को यूपीआई जैसी आसान फिनटेक प्रणाली मिल सके। श्री मोदी ने लगातार तीसरी बार इस सम्मेलन को संबोधित किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यूपीआई 11 देशों में चल रहा है। सरकार का प्रयास है कि जिन देशों में अधिक संख्या में भारतीय रह रहे हैं, जिनके साथ भारत का व्यापार ज्यादा होता और जो यूपीआई बैंकिंग के मामले में देश के साथ सहयोग करने को तैयार हैं उनके यहां यूपीआई भुगतान की व्यवस्था को उसी तरह का बना दिया जाए जैसे हम अपने यहां एक शहर में दो लोगों बीच यूपीआई भुगतान करते हैं। उन्होंने कहा कि सिंगापुर के साथ इस तरह की व्यवस्था लागू हो गई है, अन्य देशों में भी इसे ले जाने का विचार है।
उन्होंने कहा कि भारत के लोग विदेशों से घर के लिए धन भेजने में सबसे आगे हैं। इसके लिए उन्हें काफी खर्च करना पड़ता है। यूपीआई के लागू होने से खर्च में काफी कमी आ सकती है।
उन्होंने कहा कि यह इतना बड़ा कायाकल्प है कि दुनिया में फिनटेक की कोई भी चर्चा यूपीआई के बिना पूरी नहीं हो सकती है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रां ने इसे "सभ्यतागत बदलाव" करार दिया है।
श्री मोदी ने कहा कि 25 अगस्त 2026 को यूपीआई ने 10 वर्ष पूरे कर लिये हैं। अगस्त में यूपीआई के जरिये 2,400 से अधिक (2451) करोड़ लेन-देन किए गए। उन्होंने कहा, "दस वर्ष पहले जब मैं कहता था कि आपका बैंक आपके हाथ में होगा तो कुछ "बड़े जानकार" लोगों ने उसका मजाक उड़ाया था, आप उनके चेहरों का ध्यान कीजिए।"
उन्होंने जनधन खाते खोलकर बैंक का मुंह नहीं देखने वाले करोड़ों सामान्य लोगों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने की अपनी सरकार की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि वही लोग आज फिनटेक की वृद्धि को बड़ी ताकत दे रहे हैं।
श्री मोदी ने कहा कि यूपीआई नहीं होता तो सरकार आज खोखा पटरी वालों को लिए पीएम स्वनिधि योजना लागू नहीं कर पाती। इस योजना के जरिये लाखों लोगों को कामकाज के लिए बैंकों से छोटे कर्ज दिए गए हैं। इसका फायदा उनके कारोबार के विस्तार के साथ साथ रहन-सहन, स्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा के रूप में दिख रहा है।
उन्होंने कहा कि इस योजना की सफलता में यूपीआई की बहुत बड़ी भूमिका है, और इसी अनुभव से सीखते हुए फिनटेक की ताकत से आर्थिक गतिविधियों को और बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे उन छोटे कारोबारियों को लाभ होगा जिसे पारंपरिक ऋणदाता पर्याप्त सेवा नहीं दे सकते। इस प्रकार के कारोबारियों की जरूरतों को फिनटेक पूरा कर सकते हैं। ऐसे कारोबारियों की संख्या बहुत बड़ी है।
प्रधानमंत्री ने वैश्विक फिनटेक उद्योग के प्रतिनिधियों को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एजेंटिक एआई और क्वांटम प्रौद्योगिकी के तीव्र विकास के मद्देनजर असंख्य अवसरों को पहचानने और नयी पीढ़ी के फिनटेक के विकास का आह्वान किया।

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