भदोही के सांसद डॉ विनोद बिंद को निर्वाचन की चुनौती देने वाली ललितेशपति की याचिका खारिज


प्रयागराज, (दिनेश तिवारी ) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भदोही लोकसभा सीट से भाजपा सांसद डॉ विनोद कुमार बिंद के निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका खारिज कर दी है।

         न्यायालय ने कहा कि याचिका में लगाए गए आरोपों के समर्थन में आवश्यक तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। नामांकन में कथित अनियमितता और भ्रष्ट आचरण के आरोप भी पर्याप्त आधार के अभाव में स्वीकार नहीं किए जा सकते।

          न्यायमूर्ति राजवीर सिंह ने टीएमसीए कांग्रेस और सपा के संयुक्त प्रत्याशी रहे ललितेश पति त्रिपाठी की याचिका पर यह आदेश दिया। 

          वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भदोही सीट से डॉ विनोद कुमार बिंद निर्वाचित हुए थे। उन्हें 4,59,982 वोट जबकि याचिकाकर्ता ललितेश पति त्रिपाठी को 4,15, ,910 वोट मिले थे। इसके बाद त्रिपाठी ने बिंद के निर्वाचन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल की थी।

          याचिका में आरोप लगाया गया था कि बिंद का नामांकन गलत तरीके से स्वीकार किया गया। साथ ही उन्हें चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य बताते हुए जिया-उल-हक और लालती देवी के नामांकन पत्र गलत तरीके से खारिज किए जाने , चुनाव प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं करने और भ्रष्ट आचरण के आरोप भी लगाए गए थे।

             याची की ओर से दलील दी गई कि बिंद उस समय निषाद पार्टी के विधायक थे और भाजपा प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनाव लड़े थे। याची का कहना था कि उन्होंने निषाद पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया था।

          न्यायालय ने माना कि बिंद के आचरण से निषाद पार्टी की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ने का निष्कर्ष निकाला जा सकता है। इसके चलते उनकी तत्कालीन विधानसभा सदस्यता पर अयोग्यता प्रभावी हो सकती थी। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसी अयोग्यता उन्हें संसद का चुनाव लड़ने से अयोग्य नहीं बनाती।

             जिया-उल-हक और लालती देवी के नामांकन पत्रों के संबंध में न्यायालय ने कहा कि चुनाव याचिका में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि दोनों के नामांकन किस आधार पर खारिज किए गए थे। केवल यह आरोप लगा देना कि नामांकन पत्र गलत या मनमाने तरीके से खारिज किए गए , पर्याप्त नहीं है।

          बन्यायालय ने भ्रष्ट आचरण के आरोपों को भी पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने कहा कि चुनाव याचिका में केवल कानूनी प्रावधानों का उल्लेख करना पर्याप्त नहीं है। याची को यह भी स्पष्ट करना होता है कि कथित अनियमितता से चुनाव परिणाम किस तरह प्रभावित हुआ। न्यायालय ने पाया कि इस मामले में ऐसे आवश्यक तथ्यों का अभाव है। इसी आधार पर ललितेश पति त्रिपाठी की चुनाव याचिका खारिज कर दी गई।

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