नौकरी की सुरक्षा के साथ भविष्य की भी चिंता, आउटसोर्स कर्मचारियों को योगी सरकार का ‘सुरक्षा कवच’
लखनऊ, 2 सितंबर ( वार्ता) नौकरी केवल हर महीने मिलने वाली तनख्वाह का नाम नहीं है। कर्मचारी के लिए नौकरी उसके परिवार की जिम्मेदारियों, भविष्य की सुरक्षा और सामाजिक सम्मान से भी जुड़ी होती है। ऐसे में वेतन समय पर मिलने, सेवा का रिकॉर्ड सुरक्षित रहने और जरूरत पड़ने पर शिकायतों के समाधान की व्यवस्था होना बेहद महत्वपूर्ण है।उत्तर प्रदेश में आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत काम करने वाले कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही इन चिंताओं को दूर करने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम यानी यूपीकोस का शुभारंभ किया। इसके साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, तैनाती, उपस्थिति, वेतन, सामाजिक सुरक्षा और शिकायत निस्तारण को संस्थागत एवं डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की शुरुआत हुई है। सरकार का दावा है कि इससे करीब 3.50 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
यूपीकोस के माध्यम से सरकारी विभाग, आउटसोर्सिंग एजेंसियां और कर्मचारी एक पारदर्शी एवं तकनीक आधारित व्यवस्था से जुड़ेंगे। विभागों में मानव संसाधन की जरूरत का आकलन, रिक्तियों का पूर्वानुमान और उसके अनुसार कर्मचारियों की योजना तैयार की जाएगी।
भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन और मेरिट आधारित होगी। इसमें राज्य सरकार की आरक्षण नीति का पालन करते हुए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, दिव्यांगजन, महिलाओं, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों और पूर्व सैनिकों के लिए निर्धारित आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।
कर्मचारी अपने सेवा विवरण, बैंक खाते, उपस्थिति, भुगतान और अन्य जरूरी जानकारी एक ही डिजिटल मंच पर देख सकेगा। शिकायत दर्ज कराने के साथ उसकी स्थिति की निगरानी और समयबद्ध निस्तारण की सुविधा भी मिलेगी।
नई व्यवस्था में समय पर पारिश्रमिक भुगतान को प्राथमिकता दी गई है। आउटसोर्स कर्मचारियों को प्रत्येक महीने एक से पांच तारीख के बीच वेतन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। भुगतान सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में किया जाएगा।
इसके साथ ही कर्मचारी के भविष्य निधि और कर्मचारी राज्य बीमा से जुड़े खाते खुलवाने तथा नियमित अंशदान जमा कराने की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
एजेंसियों को इसके प्रमाण निर्धारित समय में निगम को उपलब्ध कराने होंगे। इससे वेतन और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित जिम्मेदारियां अधिक स्पष्ट एवं जवाबदेह होंगी।
आउटसोर्स कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ी समस्याओं में नौकरी की असुरक्षा भी रही है। नई व्यवस्था में एजेंसी को अपने स्तर से किसी कर्मचारी को मनमाने ढंग से हटाने की अनुमति नहीं होगी। अनुशासनहीनता या दंडनीय अपराध जैसी परिस्थितियों में भी संबंधित विभाग अथवा संस्था और निगम की सहमति के बाद ही कार्रवाई की जा सकेगी।
यूपीकोस की व्यवस्था केवल भर्ती तक सीमित नहीं रहेगी। कर्मचारियों की कार्यक्षमता और दक्षता बढ़ाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। सेवायोजन विभाग के पोर्टल के माध्यम से उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा और योग्यता, दक्षता तथा निर्धारित मानकों के आधार पर पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
श्रेणी-3 और श्रेणी-4 के पदों के लिए साक्षात्कार की व्यवस्था नहीं होगी। विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को चयन प्रक्रिया में वरीयता देने का भी प्रावधान किया गया है।
आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए व्यवस्था में केवल वेतन और नौकरी की सुरक्षा ही शामिल नहीं है। मातृत्व अवकाश सहित अन्य वैधानिक सेवा लाभ उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा और बैंकिंग से संबंधित अनुमन्य सुविधाओं को कर्मचारियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
यूपीकोस के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी बढ़ाया गया है। भारतीय स्टेट बैंक के साथ हुए समझौते के तहत निर्धारित वेतन श्रेणियों के अनुसार आउटसोर्स कर्मचारियों को करीब 40 लाख रुपये तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा उपलब्ध कराया जाएगा। स्थायी आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में भी निर्धारित बीमा सुरक्षा मिलेगी।
इसके अलावा जलने की स्थिति में प्लास्टिक सर्जरी के लिए 10 लाख रुपये तक, आकस्मिक दवाओं के लिए 5 लाख रुपये तक और आपात स्थिति में एयर एंबुलेंस के लिए 10 लाख रुपये तक की सुविधा का प्रावधान है।
सामाजिक सुरक्षा का दायरा कर्मचारी तक सीमित नहीं रखा गया है। किसी बड़ी दुर्घटना या अनहोनी की स्थिति में परिवार के लिए भी आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है।
कर्मचारी के पुत्र की शिक्षा के लिए 8 लाख रुपये तक और पुत्री की शिक्षा के लिए 10 लाख रुपये तक सहायता दी जा सकेगी। दो पुत्रियों के विवाह के लिए 8 से 10 लाख रुपये तक तथा कर्मचारी के अंतिम संस्कार के लिए 50 हजार रुपये तक की सहायता का प्रावधान है।
कर्मचारी और उसके परिवार के लिए शून्य शेष राशि वाले बैंक खाते की सुविधा भी उपलब्ध होगी। वेतन खाते के माध्यम से परिवार के अधिकतम चार सदस्यों को विशेष बैंकिंग योजनाओं का लाभ देने की व्यवस्था की गई है।
यूपीकोस का एक प्रमुख उद्देश्य आउटसोर्सिंग व्यवस्था में कर्मचारी, एजेंसी और विभाग के बीच जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना है।
एजेंसियों का चयन और उनका सूचीबद्धीकरण निर्धारित प्रक्रिया के तहत होगा। विभाग, निगम और एजेंसी के बीच त्रिपक्षीय व्यवस्था के माध्यम से जवाबदेही तय की जाएगी।
भर्ती से लेकर तैनाती, उपस्थिति, वेतन, सेवा लाभ, बीमा और अन्य सुविधाओं का डिजिटल प्रबंधन एवं निगरानी की जाएगी। इससे कर्मचारियों को अपनी सेवा से जुड़ी जानकारी के लिए अलग-अलग कार्यालयों या व्यक्तियों पर निर्भरता कम होगी।
सरकार का मानना है कि यूपीकोस के जरिए प्रदेश की आउटसोर्सिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और कर्मचारी-केंद्रित बनाया जा सकेगा। करीब 3.50 लाख कर्मचारियों के लिए यह पहल समय पर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सेवा संबंधी अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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