अयोध्या का वैभव रामद्रोहियों को बर्दाश्त नहीं, सनातन धर्मावलंबी 'कालनेमियों' से सावधान रहें : योगी
लखनऊ/गोरखपुर, 29 सितंबर (वार्ता) गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण हो चुका है और अयोध्या का वैभव बढ़ रहा है, लेकिन रामद्रोहियों को यह बर्दाश्त नहीं हो रहा है।
उन्होंने सनातन धर्मावलंबियों से मौजूदा दौर के 'कालनेमियों' से सावधान रहने का आह्वान करते हुए कहा कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और इसे लेकर किसी प्रकार का भ्रम या संशय नहीं होना चाहिए।
योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह के तहत आयोजित सभा को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1949 में अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि पर रामलला का प्रकटीकरण मंदिर निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। आज अयोध्या में भव्य मंदिर का निर्माण हो चुका है।
उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी में बाबा विश्वनाथ धाम, विंध्याचल में मां विंध्यवासिनी धाम, प्रयागराज का कुंभ और वृंदावन का वैष्णव कुंभ सनातन परंपरा की बढ़ती भव्यता के प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा कि सनातन से चिढ़ने वाले इन उपलब्धियों को लेकर दुष्प्रचार और भ्रम पैदा करने का प्रयास कर सकते हैं।
रामायण में कालनेमि द्वारा हनुमान जी को रोकने के प्रसंग का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि रामभक्तों और सनातन धर्मावलंबियों को ऐसे लोगों से सतर्क रहना होगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या और काशी में आई भव्यता सही दिशा में आगे बढ़ने का परिणाम है।
योगी ने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम की भावना को साकार करने के लिए सभी पंथों और संप्रदायों को एक भाव, एक स्वर और एक गति से आगे बढ़ना होगा। यदि 140 करोड़ भारतवासियों में एक साथ चलने का सामर्थ्य पैदा हो जाए तो दुनिया की कोई ताकत भारत के सामने ठहर नहीं पाएगी। उन्होंने कहा कि अलग-अलग स्वर और अलग गति से चलना देश की दुर्गति का कारण बन सकता है।
मुख्यमंत्री ने गोरक्षपीठ को संपूर्ण सनातन परंपरा के लिए समर्पित बताते हुए कहा कि यह पीठ किसी पंथ, संप्रदाय, व्यक्ति अथवा जाति के साथ भेदभाव नहीं करती। उन्होंने कहा कि उपासना की पद्धतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन सभी का कल्याण व्यापक सनातन परंपरा में निहित है।
योगी ने महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज के योगदान को याद करते हुए कहा कि संत और महापुरुष केवल वर्तमान के लिए नहीं सोचते, बल्कि उनके कार्य भविष्य की मजबूत नींव तैयार करते हैं। जब देश गुलाम था और संसाधनों का अभाव था, तब दिग्विजयनाथ जी ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की।
उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ ने शिक्षा के माध्यम से समाज निर्माण का कार्य किया। उन्होंने बालिका महाविद्यालय और संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना कर शिक्षा के क्षेत्र में दूरदर्शी पहल की। उनका उद्देश्य भारत को उसकी परंपरा और विरासत के अनुरूप आगे बढ़ाना था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की 50 से अधिक संस्थाएं आज महंत दिग्विजयनाथ जी और महंत अवेद्यनाथ जी के आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प ले रही हैं। संस्थाओं को अपने संस्थापकों के आदर्शों को कार्यशैली का हिस्सा बनाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने 2019 के प्रयागराज कुंभ के बाद वृंदावन में आयोजित वैष्णव कुंभ का उल्लेख करते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण के दौर में भी यह आयोजन सफलतापूर्वक हुआ। उन्होंने इसे बांके बिहारी लाल और राधारानी की कृपा से संभव बताते हुए कहा कि आध्यात्मिक शक्ति का प्रभाव इसी प्रकार दिखाई देता है।

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