हिन्दी में परामर्श पर्चा लिख चर्चा में आये सैफई मेडिकल कालेज के चिकित्सक

 


इटावा, 1 अक्टूबर (वार्ता) उत्तर प्रदेश के इटावा स्थित सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुशील कुमार यादव इन दिनों हिंदी में मरीजों के मेडिकल पर्चे लिखने को लेकर चर्चा में हैं। अंग्रेजी माध्यम से चिकित्सा की पढ़ाई करने के बावजूद डॉ. यादव मरीजों के पर्चे पर दवाओं के नाम और चिकित्सकीय सलाह हिंदी में लिख रहे हैं। डॉ. यादव के हिंदी में लिखे मेडिकल पर्चे का नमूना सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। वह प्रतिदिन एक सैकड़ा से अधिक मरीजों को हिंदी में पर्चा लिखने के साथ ही उन्हें उपचार और दवाओं के संबंध में सलाह भी देते हैं।

डॉ. यादव ने बताया कि हाल ही में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने चिकित्सकों से मरीजों के परामर्श-पर्चे पर दवाओं के नाम हिंदी अथवा देवनागरी लिपि में लिखने का आग्रह किया था। इसके बाद उन्होंने हिंदी में पर्चा लिखने का प्रयास और तेज किया। उन्होंने कहा कि वह सभी मरीजों के लिए हिंदी में पर्चा नहीं लिख पाते हैं, लेकिन प्रतिदिन एक सैकड़ा से अधिक मरीजों को हिंदी में पर्चा देने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने कहा कि गांव और देहात से आने वाले कई मरीज अंग्रेजी में लिखी चिकित्सकीय सलाह और दवाओं के नाम आसानी से नहीं समझ पाते। ऐसे में हिंदी में पर्चा लिखने का उद्देश्य मरीजों को बीमारी, दवा और चिकित्सकीय परहेज के बारे में आसानी से समझाना है, ताकि वे उपचार संबंधी निर्देशों का सही ढंग से पालन कर सकें।
डॉ. यादव के अनुसार, हिंदी के प्रति उनका लगाव एमबीबीएस की पढ़ाई के समय से ही रहा है। उन्होंने बताया कि गोरखपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान न्यूरो सर्जन डॉ. बीके मौर्य मरीजों के लिए हिंदी में पर्चे लिखा करते थे और चिकित्सकीय सलाह भी हिंदी में देते थे। डॉ. राधा मोहन अग्रवाल भी हिंदी में पर्चा लिखने वाले चिकित्सकों में रहे हैं। बाद में वह गोरखपुर से सांसद निर्वाचित हुए।
उन्होंने कहा कि इन चिकित्सकों से उन्हें हिंदी में चिकित्सा संबंधी जानकारी देने की प्रेरणा मिली। अब उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की अपील ने उनके इस प्रयास को और प्रोत्साहित किया है।
डॉ. यादव ने बताया कि उन्होंने हिंदी में ईसीजी से संबंधित पुस्तक भी लिखी है, जिसका विमोचन पिछले वर्ष विश्व हृदय दिवस पर किया गया था। इसके अलावा उन्होंने लीवर और डायबिटीज से संबंधित पुस्तकें भी हिंदी में लिखी हैं।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में अंग्रेजी के कुछ शब्दों का हिंदी में सरल रूप देना कठिन होता है, लेकिन इसके बावजूद वह मरीज की सुविधा को प्राथमिकता देते हैं। उनका प्रयास है कि मरीज अपनी बीमारी और उपचार को बेहतर ढंग से समझे तथा दवाओं के सेवन और परहेज संबंधी निर्देशों का पालन कर सके।
डॉ. यादव ने हिंदी के प्रति अपने लगाव का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव को भी प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव अपने अधिकांश काम हिंदी में किया करते थे और हिंदी को बढ़ावा देने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
उल्लेखनीय है कि उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रदेश के चिकित्सकों को पत्र भेजकर मरीजों की सुविधा और विश्वास को ध्यान में रखते हुए परामर्श-पर्चे पर दवाओं के नाम हिंदी अथवा देवनागरी लिपि में लिखने का आग्रह किया है। उन्होंने चिकित्सकों से मरीजों के साथ उनकी मातृभाषा या स्थानीय भाषा में संवाद को बढ़ावा देने की भी अपील की है। उन्होंने कहा है कि भोजपुरी, अवधी और ब्रजभाषा जैसी स्थानीय भाषाओं में संवाद से मरीज अपनी समस्या और चिकित्सकीय सलाह को अधिक आसानी से समझ सकेंगे।

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