इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र आंदोलन
प्रयागराज,(दिनेश तिवारी) इलाहाबाद विश्वविद्यालय में मंगलवार को छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर छात्र महाजुटान आंदोलन शुरू कर दिया। बड़ी संख्या में छात्र विश्वविद्यालय के मेन गेट पर पहुंचे और चक्काजाम कर विरोध जताया। इसके बाद छात्रों ने कैंपस में मार्च निकालकर नारेबाजी की।
छात्र फीस वृद्धि, पाठ्यक्रमों में सीटों की कटौती, निलंबित छात्रों की बहाली और विश्वविद्यालय की बुनियादी सुविधाओं में सुधार की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी है।
छात्रों का आंदोलन 10 जुलाई से चल रहा है। सोमवार को छात्रों ने आंदोलन को भूख हड़ताल में बदल दिया। आंदोलनकारी छात्र छात्रसंघ भवन से धरना स्थल बदलकर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर पहुंचे और वहां अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी।
मंगलवार को छात्र महाजुटान के जरिए आंदोलन को और व्यापक रूप दिया गया। बड़ी संख्या में छात्र विश्वविद्यालय परिसर में जुटे। छात्रों ने कैंपस में मार्च निकाला और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद मेन गेट पर चक्काजाम कर अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया।
आंदोलनकारी छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय के स्नातक पाठ्यक्रमों में हर साल करीब 10 प्रतिशत और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में करीब 14 प्रतिशत फीस बढ़ाई जा रही है। छात्रों का कहना है कि लगातार फीस बढ़ने से आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के सामने पढ़ाई जारी रखने की चुनौती बढ़ रही है।
छात्रों के मुताबिक विश्वविद्यालय में विभिन्न पाठ्यक्रमों की करीब 6 हजार सीटें कम कर दी गई हैं। इससे प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या प्रभावित हो रही है। छात्र सीटों में की गई कटौती को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। कुलपति के गेट पर छात्र चढ़ कर विरोध में नारेबाजी की।
छात्र नेताओं ने निलंबित छात्रों को तत्काल बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर विश्वविद्यालय प्रशासन को पुनर्विचार करना चाहिए। इसके अलावा विश्वविद्यालय के हेल्थ सेंटर समेत परिसर की बुनियादी सुविधाओं में सुधार की मांग भी आंदोलन में प्रमुख रूप से उठाई जा रही है।
छात्र नेताओं का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैंए लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं निकला है। इसी वजह से छात्र महाजुटान का आयोजन किया गया है। छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेताए तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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