रामभद्राचार्य न पेश हुए, न ही नोटिस का जवाब दिया
प्रयागराज, (दिनेश तिवारी) तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ प्रयागराज की जिला अदालत दर्ज परिवाद मामले में सोमवार को सुनवाई हुई। प्रयागराज कोर्ट में न तो रामभद्राचार्य पेश हुए न ही उनकी तरफ से नोटिस का जवाब आया। न ही उनके वकीलों ने अदालत में कोई जवाब दाखिल किया।
मामले की सुनवाई अब 31 अक्टूबर को होगी।
रामभद्राचार्य पर परिवाद वाराणसी के रहने वाले याचिकाकर्ता सुरेश चंद्र उपाध्याय ने 14 सितंबर 2026 दर्ज कराया था।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, 3 फरवरी 2024 को वृंदावन में भागवत कथा के दौरान रामभद्राचार्य ने उपाध्याय समाज पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा .इस बयान से बच्चों की शादी में रुकावट आई है।
रामभद्राचार्य ने कहा था, हमारे यहां उपाध्याय, चौबे, त्रिगुणायत, दीक्षित और पाठक को इसलिए अधम मानते हैं। क्योंकि इन्होंने विद्यार्थियों से पैसा लेकर पढ़ाया। इनके यहां हम बेटी नहीं देते और न इनके यहां से बेटी लेते हैं। हम विद्यार्थी का एक पैसा भी लेना गोमांस के बराबर समझते हैं। उनके यहां ऊंचे कुल के लोग अपनी बेटी नहीं देते हैं।उन्होंने कहा .इस बयान से बच्चों की शादी में रुकावट आई है।
" मैं सरयूपारीण ब्राह्मण हूं। पहले मैं ब्राह्मण हूं। वह भी वशिष्ठ गोत्रीय ब्राह्मण हूं। फिर साधु हूं, फिर संन्यासी हूं, फिर जगद्गुरु रामानंदाचार्य हूं। मुझे अपने ब्राह्मणत्व पर गर्व है।"
याचिकाकर्ता इस सिलसिले में पुलिस कमिश्नर प्रयागराज से मिले थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद अदालत में याचिका दी। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई करना जरूरी बताया।

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