अब कम खर्च में तैयार होंगी छोटी माइक्रोचिप
प्रयागराज, (दिनेश तिवारी) भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) के वैज्ञानिकों ने कम खर्च में माइक्रोचिप और माइक्रो डिवाइस बनाने की नई तकनीक विकसित की है।
इस तकनीक से लैब.ऑन.चिप और बायोमेडिकल उपकरणों के उत्पादन में आसानी होगी। इस तकनीक का पेटेंट भी हासिल किया गया है।
इससे लैब.ऑन.चिप, माइक्रोफ्लूइडिक और बायोमेडिकल उपकरण तैयार करना आसान और किफायती हो सकता है। " सिस्टम फॉर क्रिएटिंग प्रिसाइज माइक्रोस्ट्रक्चर्स बेस्ड ऑन वेरियस पॉलिमर्स यूजिंग मल्टीपल अपरेटस " नाम की इस तकनीक को ट्रिपलआईटी के प्रो अमित प्रभाकर, अमर ध्वज आकाशदीप और नेहा मिश्रा ने विकसित किया है।
इसका मुख्य उद्देश्य माइक्रो स्तर के उपकरण तैयार करने की लागत को कम करना है। प्रो प्रभाकर के अनुसार आमतौर पर बेहद छोटे आकार की संरचनाएं और माइक्रोचिप बनाने के लिए महंगे माइक्रोफैब्रिकेशन उपकरण और जटिल प्रक्रियाओं की जरूरत होती है। नई तकनीक में कम लागत वाले पराबैंगनी (यूवी) प्रकाश आधारित सिस्टम और पॉलिमर का इस्तेमाल किया गया है। इससे कम संसाधनों में भी जरूरत के मुताबिक महीन माइक्रो संरचनाएं तैयार की जा सकती हैं।

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