बूथ अध्यक्ष से राज्यसभा के रण तक पहुंचे विद्यासागर सोनकर

 


जौनपुर, 05 अक्टूबर (वार्ता) उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में विद्यासागर सोनकर का बूथ की सियासत से शुरू हुआ सफर अब संसद के उच्च सदन तक पहुंचने की दहलीज पर है।

वर्ष 1985 में भाजपा के बूथ अध्यक्ष के रूप में राजनीतिक पारी शुरू करने वाले विद्यासागर सोनकर ने करीब चार दशक के सियासी सफर में सभासद से लेकर सांसद, विधान परिषद सदस्य और प्रदेश महामंत्री तक का मुकाम हासिल किया। पार्टी ने अब उनकी लंबे समय की संगठनात्मक सक्रियता और निष्ठा पर भरोसा जताते हुए उन्हें राज्यसभा सदस्य के लिए प्रत्याशी बनाया है। उनके प्रत्याशी बनाए जाने की खबर मिलते ही पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई।
विद्यासागर सोनकर ने वर्ष 1985 में भाजपा के बूथ अध्यक्ष के रूप में संगठन की जमीनी राजनीति से कदम रखा। इसके बाद वर्ष 1989 में सभासद का चुनाव जीतकर उन्होंने सक्रिय राजनीति में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। संगठन ने समय-समय पर उन्हें विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपीं और उन्होंने प्रत्येक दायित्व को पूरी निष्ठा व लगन के साथ निभाया।
वर्ष 1996 में सैदपुर (सु.) लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर वह पहली बार संसद पहुंचे। सांसद बनने के बाद भी उनका संगठन से जुड़ाव कम नहीं हुआ। पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ठों में जिम्मेदारी निभाने के साथ ही वह भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। संगठन के प्रति उनकी सक्रियता का ही परिणाम रहा कि तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य की टीम में उन्हें प्रदेश महामंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली।
बसियासत में उतार-चढ़ाव भी उनके सफर का हिस्सा रहा। वर्ष 2009 में उन्होंने मछलीशहर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं मिली। इसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें गाजीपुर की सैदपुर विधानसभा सीट से मैदान में उतारा, जहां भी उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। हालांकि चुनावी हार के बावजूद संगठन में उनकी सक्रियता और पकड़ कमजोर नहीं हुई।
वर्ष 2018 में भाजपा ने उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद का सदस्य बनाया। जनप्रतिनिधि के रूप में भी वह कार्यकर्ताओं और आमजन के बीच लगातार सक्रिय और सहज उपलब्ध रहे। संगठन के छोटे से दायित्व से शुरुआत कर प्रदेश स्तर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों तक पहुंचने वाले सोनकर का राजनीतिक सफर भाजपा में संगठन के प्रति समर्पण की मिसाल के तौर पर देखा जाता है।
अब पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के लिए प्रत्याशी बनाकर एक बार फिर उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठन के प्रति निष्ठा पर मुहर लगाई है। उनके नाम की घोषणा के बाद समर्थकों में उत्साह है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि बूथ स्तर से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर अब संसद के उच्च सदन में पहुंचकर नई ऊंचाई हासिल करने जा रहा है।

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