बालिग समलैंगिक जोड़े को साथ रहने का अधिकार , परिवार या समाज नहीं डाल सकता बाधा:उच्च न्यायालय
प्रयागराज,(दिनेश तिवारी) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर बालिग को अपनी पसंद का साथी चुनने, व्यक्तिगत स्वायत्तता बनाए रखने और सहमति से साथ रहने का अधिकार है। सामाजिक विरो, पारंपरिक मान्यताओं या परिवार की नाराजगी के आधार पर किसी की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति डॉ गौतम चौधरी की एकल पीठ वाराणसी की दो बालिग युवतियों के समलैंगिक लिव.इन संबंध से जुड़े मामले में सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया । दोनों युवतियों ने सुरक्षा की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। याचिका में बताया कि दोनों बालिग और अविवाहित हैं। अपनी इच्छा से साथ रह रही हैं। दोनों अलग.अलग धर्मों से संबंध रखती हैं। याचियों का आरोप था कि नाराज परिजन और रिश्तेदार उनके शांतिपूर्ण जीवन में बाधा डाल रहे हैं। पूर्व आदेश के अनुपालन में दोनों युवतियां अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुईं। अदालत ने उनसे अलग.अलग बातचीत कर उनके बयान दर्ज किए। दोनों ने स्पष्ट किया कि वे बालिग हैं। अपने फैसले के परिणामों...